PoK को कैसे संभालेगी शरीफ सरकार? सड़कों पर उतरे हजारों लोग, लगे 'आजादी' और 'आटा-बिजली' के नारे

Rahul Jadaun 05 Jul 2026 05:18: PM 1 Mins
PoK को कैसे संभालेगी शरीफ सरकार? सड़कों पर उतरे हजारों लोग, लगे 'आजादी' और 'आटा-बिजली' के नारे

मुजफ्फराबाद/मीरपुर: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और वहां की दमनकारी सेना के खिलाफ स्थानीय जनता का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर समेत PoK के कई बड़े शहरों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कई जगहों पर 'आजादी' के नारे भी गूंजे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते पूरे इलाके में तनाव का माहौल है।

महंगाई, आटा और भारी-भरकम बिजली बिल बनी वजह

स्थानीय एक्टिविस्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भारी आक्रोश की मुख्य वजह PoK में आसमान छूती महंगाई, आटे की भारी किल्लत और बिजली के बिलों पर लगाया गया अत्यधिक टैक्स है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PoK की नदियों से पाकिस्तान बिजली बनाता है, लेकिन खुद वहां के लोगों को ही सबसे महंगी बिजली बेची जा रही है और घंटों लोडशेडिंग का सामना करना पड़ रहा है। 'अवामी एक्शन कमेटी' के बैनर तले आम जनता, व्यापारियों और वकीलों ने मिलकर इस आंदोलन को तेज कर दिया है।

पाकिस्तानी सेना और पुलिस के साथ हिंसक झड़पें

हालात को काबू में करने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है। कई इलाकों से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों की भी खबरें आ रही हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जिसके जवाब में आक्रोशित जनता ने पथराव किया। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां जबरन उठा रही हैं और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूंज रहा है मुद्दा

PoK के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान दशकों से उनके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ गरीबी और भुखमरी मिल रही है। सोशल मीडिया पर भी PoK के इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग पाकिस्तानी सेना को वापस जाने और अपने हक की मांग करते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन अब सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे के खिलाफ एक बड़ी बगावत का रूप लेता जा रहा है।

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