जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने कस्टडी में लिया तो अखिलेश बोले- BJP से न्याय की उम्मीद नहीं

Amanat Ansari 31 Oct 2026 10:00 PM 2 Mins
जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने कस्टडी में लिया तो अखिलेश बोले- BJP से न्याय की उम्मीद नहीं

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जिला जेल से रिहा हुए, लेकिन जेल गेट के बाहर ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कस्टडी में ले लिया. उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रिहा होकर घर चले गए. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी. दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई. स्थानीय अदालतों से रिहाई आदेश आने के बाद शनिवार शाम करीब 7 बजे दोनों जेल से बाहर निकले.  जेल के बाहर ED की टीम करीब 15 गाड़ियों और 50 CRPF जवानों के साथ पहले से मौजूद थी.

आजम खान के बाहर आते ही टीम ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया. गाड़ी में बैठाने के दौरान कुछ देर तकरार और धक्कामुक्की हुई. समर्थकों ने नारेबाजी की. पुलिस बल ने स्थिति संभाली. अब्दुल्ला आजम को जाने दिया गया. ED आजम खान को गाजियाबाद स्थित PMLA कोर्ट में पेश करने की तैयारी में है. 

किस मामले में कार्रवाई

ED की कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है. 28 अक्टूबर को ED ने विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया था, जिनकी कीमत 426.46 करोड़ रुपये बताई गई (बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये). आरोपों में सरकारी धन और संसाधनों के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताएं और जमीन संबंधी मामले शामिल हैं. 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में भी संबंधित FIR दर्ज हुई थी.

आजम खान 17 नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे. जेल अधीक्षक ने पुष्टि की कि कई मामलों में रिहाई आदेश मिले थे. कस्टडी में लिए जाने के दौरान आजम खान भावुक हो गए और कहा, ''अब कहने को क्या बचा है? कानून का वजूद खत्म हो चुका है. क्या यह मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई.'' 

अखिलेश की प्रतिक्रिया

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर BJP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि BJP से न्याय की उम्मीद नहीं है. उन्होंने पहले भी (22 अक्टूबर को जेल मुलाकात के दौरान) कहा था कि आजम खान के परिवार के साथ जितना अन्याय हुआ, उतना किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ.

फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं कि सच को लंबे समय तक कैद रखा जा सके. सपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है. यह घटना 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ED की जांच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया PMLA कोर्ट में तय होगी.

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