नई दिल्ली: इजरायल में हाल ही में हुए राष्ट्रीय चुनाव में कथित विदेशी प्रभाव की जांच में अब खुफिया एजेंसी मोसाद भी शामिल हो गई है. मोसाद, शिन बेट सुरक्षा सेवा की मदद कर रही है. आरोपों में कतर और तुर्की जैसे देशों द्वारा चुनाव को प्रभावित करने की आशंका जताई जा रही है.
केंद्रीय चुनाव समिति ने कहा है कि जांच का दायरा सीमित है और चुनाव नतीजों पर कोई सवाल नहीं है. कतर और तुर्की दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने मतदान को प्रभावित करने की कोई कोशिश नहीं की. यह विवाद मंगलवार को पोलिंग बूथों पर अरब मतदाताओं को पैसे देकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के आरोपों से जुड़ा है.
रिश्वतखोरी के शक में तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि अभी तक कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है. पुलिस ने उनके घरों पर छापेमारी की थी. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से शुरू हुआ था. बेंजामिन नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ इडो नोर्डन से मिली टिप के बाद पुलिस ने छापेमारी की.
चुनाव नतीजों की स्थिति
इजरायल के चुनाव नतीजे आने के बाद 120 सदस्यीय नेसेट की तस्वीर साफ हो गई है, लेकिन अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह तय नहीं हो पाया है. नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 53 सीटें और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट की यशार पार्टी को 48 सीटें मिली हैं.
सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने ऐतिहासिक रूप से 19 सीटें हासिल की हैं, जिससे सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है. जांच जारी है और आधिकारिक रूप से चुनाव नतीजों पर कोई असर पड़ने की बात नहीं कही गई है.