नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर शनिवार को संसद के संविधान सदन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी एक ही मंच पर मौजूद रहे. दोनों के बीच संभावित आमने-सामने की स्थिति तब टल गई, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बीच में आ गए.
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य नेता भी शामिल थे. वीडियो में सोनिया गांधी और स्वामी के करीब आने की स्थिति दिखी, जिसके बाद खड़गे दोनों के बीच आ गए. राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा हो रही है कि क्या खड़गे ने जानबूझकर दूरी बनाए रखी. हालांकि, केवल कुछ सेकंड के वीडियो के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि असहजता किस तरफ थी.
11 साल पुरानी अदावत का कारण नेशनल हेराल्ड केस
सोनिया गांधी और सुब्रमण्यम स्वामी के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी टकराव चल रहा है, जिसकी मुख्य वजह नेशनल हेराल्ड मामला है. स्वामी ने 2012-13 में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ निजी आपराधिक शिकायत दाखिल की थी.
उनके आरोप के अनुसार, कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज दिया, जिसे बाद में यंग इंडियन कंपनी के जरिए महज 50 लाख रुपये में हासिल कर लिया गया. सोनिया और राहुल गांधी की यंग इंडियन में 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है. कांग्रेस इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए खारिज करती रही है.
जून 2014 में दिल्ली की अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए समन जारी किए थे. दिसंबर 2015 में सोनिया और राहुल गांधी अदालत में पेश होकर जमानत पर आए थे. बाद में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में शिकायत दाखिल की, लेकिन दिसंबर 2025 में विशेष अदालत ने संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह निजी शिकायत पर आधारित था और एफआईआर नहीं थी. सितंबर 2026 में गांधी परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा.
यह घटनाक्रम दोनों के बीच लंबे टकराव को फिर से चर्चा में लाया है. आधिकारिक रूप से दोनों की पिछली नजदीकी मुलाकात का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है, लेकिन नेशनल हेराल्ड केस ने उनके रिश्तों को राजनीतिक रूप से दूर कर दिया है.