कोर्ट के सामने झूठ बोलना एक वकील को तब भारी पड़ गया, जब जज साहब के सामने ये बात सामने आई कि ये वकील साहब एक कोर्ट में हाजिरी लगा रहे हैं, जबकि दूसरे में बीमारी का बहाना बना रहे हैं...कोर्ट ने वकील के इस आचरण को गुमराह करने की कोशिश बताते हुए बड़ा आदेश दिया...
अपीयरेंस स्लिप से खुली पोल
न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की अदालत कहा वकील का आचरण यह दिखाता है कि उन्होंने न्यायालय को धोखा देने का प्रयास किया, जो न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है. वकील होने के नाते यह उनका कर्तव्य है कि वह सही तथ्यों के साथ न्यायालय की सहायता करें ताकि कोर्ट का बहुमूल्य समय बचाया जा सके. पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता के वकील ने साफ कहा अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने एक विशेष अपील में दूसरी कोर्ट में उपस्थिति जताई और इधर बीमारी का बहाना बना दिया.. बकायदा शिकायतकर्ता के वकील ने जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के आचरण पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कोर्ट को सबूत के तौर पर ‘अपीयरेंस स्लिप’ दिखाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जिस समय वकील ने बीमारी का हवाला देकर कोर्ट नंबर 71 से स्थगन मांगा था, उसी समय वह मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में एक ‘स्पेशल अपील’ में बहस कर रहे थे...जिसका खुलासा होते ही जज साहब भड़क उठे और वकील पर जुर्माना लगा दिया..
20 हजार का लगा जुर्माना
पूरा मामला वाराणसी के कैंट थाने में दर्ज मुकदमे की एक अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान का है. जहां वकील पर अदालत ने 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और कहा एक महीने के भीतर इसे जमा करना होग. अगर जुर्माने की राशि समय पर जमा नहीं की गई तो बार काउंसिल के सामने उचित कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है...यानि वकील को एक महीने के भीतर किसी भी हाल में जुर्माना जमा करना होगा...फिलहाल इस मामले की चर्चा पूरे यूपी में हो रही है...