अमेठी : उत्तर प्रदेश के अमेठी में समाजवादी पार्टी की विधायक महाराजी प्रजापति के आवास पर कथित मारपीट और धमकी के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है. मामले को लेकर अब सपा के भीतर जातीय वर्चस्व और पीडीए राजनीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
विवाद तब बढ़ा जब विधायक के बेटे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कुछ सपाइयों पर घर में घुसकर अभद्रता, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया. वीडियो में जय यादव, बलराम यादव और शेर बहादुर यादव जैसे नाम लिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई.
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने सपा नेतृत्व पर निशाना साधा है. मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पार्टी में गैर-यादव पिछड़ों और दलित नेताओं को केवल चुनावी जरूरत तक सीमित रखा जाता है, जबकि संगठन और संरक्षण में जातीय पक्षपात दिखाई देता है.
सोशल मीडिया पर वायरल एक तीखे बयान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधे हमला बोला गया. बयान में कहा गया कि समाजवादी पार्टी में गैर यादव पिछड़ों और दलितों की भूमिका सिर्फ झंडा उठाने और वोट देने तक सीमित है, जबकि सत्ता और संरक्षण पर सिर्फ एक जाति का कब्जा है.
बयान में आगे महाभारत के धृतराष्ट्र का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव पर यादव मोह में चुप रहने का आरोप लगाया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि जब पार्टी की अपनी महिला विधायक सुरक्षित नहीं हैं, तब आम पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं स्थानीय स्तर पर पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेठी की यह घटना आने वाले समय में सपा की पीडीए रणनीति और उसके सामाजिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है. खासकर गैर-यादव ओबीसी समुदाय के बीच यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बनता दिख रहा है.