नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक नेताओं के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत की, जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम शामिल थे. इन चर्चाओं का मुख्य फोकस मध्य पूर्व में बढ़ती तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं पर रहा.
पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की, जिसमें वैश्विक चिंता को रेखांकित किया गया कि संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के साथ तीव्र सैन्य टकराव में हिस्सा लिया है, जिसमें सैन्य और नागरिक ढांचे को निशाना बनाया गया है.
इससे वैश्विक तेल व्यापार और अन्य आवश्यक आपूर्तियों पर असर पड़ा है, जिसके कारण पूरी दुनिया इन घटनाओं को सांस थामकर देख रही है. उन्होंने कहा, "पश्चिम एशिया की स्थिति और डी-एस्केलेशन की तत्काल आवश्यकता पर मेरे प्रिय मित्र से बात की, साथ ही संवाद और कूटनीति की ओर लौटने की जरूरत पर भी." उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों राष्ट्र "क्षेत्र और उससे आगे शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए निकट समन्वय जारी रखेंगे".
ओमान के सुल्तान से बातचीत के बाद एक्स पर पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, "मेरे भाई सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ उत्पादक बातचीत हुई और ओमान के लोगों को अग्रिम ईद की शुभकामनाएं दीं." डी-एस्केलेशन की तात्कालिकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "हमने संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देकर डी-एस्केलेशन और उसके बाद शांति व स्थिरता की बहाली पर सहमति जताई."
क्षेत्र में ईरान की बढ़ती आक्रामकता और मुद्रा के संदर्भ में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री ने भारत की स्थिति दोहराई. उन्होंने कहा कि उन्होंने "ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत की निंदा दोहराई और हजारों लोगों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में ओमान के प्रयासों की सराहना की."
ओमान उन खाड़ी देशों में शामिल था, जिन्हें क्षेत्र में अमेरिकी सुविधाओं पर ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने समुद्री सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया और कहा, "भारत और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और मुक्त नौवहन के पक्षधर हैं."