Amit Shah Vedas retirement: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने रिटायरमेंट का प्लान बताया है, शाह ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अपने सेवानिवृत्त जीवन को वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन और प्रचार में लगाना चाहते हैं। अहमदाबाद में आयोजित एक सभा में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू संस्कृति और वैदिक परंपरा ही भारत की आत्मा हैं और उनका संरक्षण करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
अमित शाह ने यह बातें सहकार संवाद में कहीं। उन्होंने कहा, “आज अगर भारत की आत्मा जीवित है तो उसका कारण वेद, उपनिषद, श्रीमद भगवद गीता और रामायण हैं। मैं जब राजनीति से संन्यास लूंगा तो वेद, उपनिषद, भगवद गीता और रामायण का अध्ययन करूंगा और प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने में समय दूंगा।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करना अब जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी संस्कृति और मूल्यों को भूल जाता है, उसका भविष्य खतरे में पड़ जाता है।
गाय और गंगाजल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पश्चिमी देश आज गाय और गंगाजल के महत्व को समझने लगे हैं, जबकि हमने इन्हें हमेशा से जीवन का हिस्सा माना है।”
अमित शाह ने पाठशाला को लेकर भी संतोष जताया और कहा कि आज की पीढ़ी को संस्कृत भाषा, शास्त्र और भारतीय संस्कृति से जोड़ने के प्रयास बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पाठशाला के माध्यम से युवाओं में वेद, गीता और संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि मोदी ने दुनिया को योग का महत्व समझाया और अब भारत धर्म, संस्कृति और परंपरा के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
अंत में अमित शाह ने कहा कि वेद और उपनिषद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के वैज्ञानिक और व्यावहारिक मार्गदर्शक भी हैं। उनके मुताबिक, इनका अध्ययन न केवल आध्यात्मिक विकास देता है, बल्कि सामाजिक संतुलन और प्राकृतिक जीवनशैली की ओर भी प्रेरित करता है।