नई दिल्ली: एप्पल ने अमेरिका में बिकने वाले सभी iPhone भारत में बनाने की योजना बनाई है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन से आयात पर भारी टैरिफ की धमकी के जवाब में उठाया गया है. यह योजना एप्पल की आपूर्ति श्रृंखला को चीन से बाहर विविध करने की रणनीति का हिस्सा है, जहां अभी भी कंपनी का अधिकांश उत्पादन होता है.
अगर यह योजना सफल रही, तो 2026 तक भारत में हर साल 6 करोड़ से ज्यादा iPhone बनाए जाएंगे, जो वर्तमान उत्पादन से दोगुना है. अमेरिका एप्पल का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 2024 में कंपनी की वैश्विक iPhone बिक्री का 28% हिस्सा था. भारत में उत्पादन बढ़ाने से एप्पल को न केवल टैरिफ से बचने में मदद मिलेगी, बल्कि अमेरिका-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव के जोखिम भी कम होंगे.
ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयात पर 145% तक टैरिफ लगाए थे, और स्मार्टफोनों पर 20% शुल्क अभी भी लागू है. हालांकि कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट दी गई, लेकिन यह अस्थायी है. ट्रंप ने सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों पर नए टैरिफ की बात भी कही है, जो एप्पल के सभी उपकरणों को प्रभावित कर सकता है. मार्च 2025 तक के वित्तीय वर्ष में, एप्पल ने भारत में 22 अरब डॉलर मूल्य के iPhone असेंबल किए, जो पिछले साल से 60% ज्यादा है.
अब दुनिया के 20% iPhone भारत में बनते हैं. यह उत्पादन मुख्य रूप से तमिलनाडु में फॉक्सकॉन के विशाल कारखाने और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के संयंत्रों में होता है, जिसने विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन की इकाइयों को अपने नियंत्रण में लिया है. भारत सरकार भी एप्पल का साथ दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और 2.7 अरब डॉलर की नई सब्सिडी योजनाएं इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा दे रही हैं.
2024 की शुरुआत में ट्रंप के टैरिफ से एप्पल के बाजार मूल्य में 700 अरब डॉलर की गिरावट आई थी. इसके जवाब में, एप्पल ने भारत में बने iPhone अमेरिका भेजने शुरू किए. हालांकि, चुनौतियाँ बाकी हैं. iPhone की असेंबली भारत में हो रही है, लेकिन इसके ज्यादातर कल-पुर्जे अभी भी चीन से आते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला को स्थानांतरित करने में कई साल लग सकते हैं.
फ्यूचरम ग्रुप के सीईओ डैनियल न्यूमैन ने कहा, "यह कदम एप्पल की वृद्धि और गति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. हम देख रहे हैं कि कंपनी टैरिफ जोखिम से निपटने के लिए तेजी से कदम उठा रही है." 2025 की पहली तिमाही में, एप्पल ने 5.79 करोड़ iPhone शिप किए, जो पिछले साल से 10% ज्यादा है. यह टैरिफ लागू होने से पहले अमेरिका में स्टॉक बढ़ाने की रणनीति थी.