Delhi Liquor Scam Case: CM अरविंद केजरीवाल के वो 14 प्यादे जिनकी सांप सीढ़ी में वो खुद फंस गए

Global Bharat 26 Jun 2024 03:31: PM 3 Mins
Delhi Liquor Scam Case: CM अरविंद केजरीवाल के वो 14 प्यादे जिनकी सांप सीढ़ी में वो खुद फंस गए

शराब घोटाले में कोई ऐसा सबूत है कि CBI ने जज साहब के सामने ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया? राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई चल रही थी. ये देश के इतिहास का पहला मौका था. जब जजों के सामने ही किसी CM को गिरफ्तार किया गया हो. क्या केजरीवाल BJP के बनाए जाल में बुरी तरफ फंस गए हैं? या केजरीवाल को समझ में आ चुका है कि अब उनके पास कुछ बचा नहीं है.

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कहते हैं शाम का सूरज ढलता है तो अपनी परछाई छोड़ जाता है. दिल्ली में शराब घोटाले की पहली गिरफ्तारी 28 सितंबर साल 2022 में हुई. उस वक्त एक प्यादा पकड़ा गया था, जिसका नाम था समीर महेंद्रू.  ED ने कोर्ट से कहा था कि समीर महेंद्रू देश का बड़ा शराब कारोबारी है. ED ने दावा किया था कि उसने दो अवैध ट्रांसफर किए.

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पहले वो दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष के करीबी दिनेश अरोड़ा को एक करोड़ देता है. फिर एक बिचौलिए अर्जुन पाण्डे को 2 से चार करोड़ कैश में देता है. यही वो प्यादा है जिसके बाद दिल्ली की पूरी सरकार फंस गई. ED ने कोर्ट को बताया था, विजय नायर के कहने पर पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई थी. आम आदमी पार्टी का फंड कलेक्टर विजय नायर को ही कहा जाता था.  वो साल 2014 में जुड़ा और पार्टी के लिए फंड जुटाने के लिए कुछ भी करता.

कहते हैं अगर कोई होशियार व्यक्ति अपराध की दुनिया में कदम रखता है तो पुलिस कांप जाती है. ऐसे ही जब कोई पढ़ा लिखा नेता घोटाला करता है तो CBI को भी सबूत जुटाने में लंबा वक्त लग जाता है. पहले प्यादे की गिरफ्तारी के बाद CBI ने केजरीवाल को गिरफ्तार करने में करीब 20 महीने का वक्त लगा दिया.

दिल्ली सरकार पूरी तरह से कोर्ट के चंगुल में फंस गई . वो इसलिए क्योंकि मनी लॉंड्रिंग केस में सबूत ज्यादा नहीं थे. हालांकि शराब घोटाले में सबूत और गवाह दोनों है. CBI और ED ने केजरीवाल तक पहुंचने में कई रास्ते बनाए. मंजिल केजरीवाल ही थे. इसलिए जज साहब भी चाहकर CBI को गिरफ्तार करने से रोक नहीं पाए.

2022 में ED-CBI की पहली सीढ़ी समीर महेंद्रू बने. दूसरी सीढ़ी पी शरत चंद्र रेड्डी. तीसरी सीढ़ी बिनॉय बाबू तो चौथी सीढ़ी विजय नायर बने. ED-CBI की पांचवीं सीढ़ी अभिषेक बोइनपल्ली बने तो छठवीं सीढ़ी अमित अरोड़ा बनाए गए.

बात आगे बढ़ी साल बदला और 2023 में भी एक्शन जारी रहा. ED-CBI को अपनी सातवीं सीढ़ी गौतम मल्होत्रा के रूप में मिली तो आठवीं राजेश जोशी, नौवीं राघव मगुंटा तो दसवीं अमन धाल,  ग्यारहवीं सीढ़ी अरूण पिल्लई तो 12वीं सीढ़ी मनीष सिसोदिया बने. 13वें दिनेश अरोड़ा तो 14वें संजय सिंह बने और साल 2024 में पंद्रहवी सीढ़ी खुद केजरीवाल बन गए.

यहां सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल ने जिन्हें अपना प्यादा बनाया था वही केजरीवाल के काल बन गए? आज केजरीवाल के जेल जान से स्पष्ट होता है कि वे अपने ही सांप-सीढ़ी के खेल में फंस गए और केजरीवाल के प्यादे ही उनके लिए जहरीले सांप साबित हुए.

कहते हैं कोई भी आरोपी अपने पीछे सबूत छोड़ जाता है. लेकिन केजरीवाल ने ना कोई पद लिया, ना कोई सिग्नेचर किए फिर CBI ने कैसे जाल में फंसा लिया. दिल्ली का शराब घोटाला एक बहुत बड़ा उदाहरण उनके लिए है जो कहते हैं बच जाएंगे, सबूत नहीं छोड़ेंगे. ये बात खुद केजरीवाल भी जानते हैं कि दिल्ली में जो हुआ वो ठीक नहीं हुआ. यही कारण है कि उन्होंने खुद से ज़मानत याचिका वापस ले ली है. ये वो वक्त है जब वफादारी पर बेईमानी भारी पड़ गई.

एक नायक से केजरीवाल शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार होंगे ये किसने सोचा था. शाम का सूरज अपनी परछाई छोड़ जाता है ठीक वैसे ही हर एक बेईमान अपना इतिहास लिख जाता है, जिसे कोई पढ़ा लिखा समाज नहीं पढ़ता है. केजरीवाल का चैप्टर अब देश के सामने आने वाला है. क्योंकि खिचड़ी पक गई है बस खाने का इंतज़ार कीजिए.

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