CJI पर हमले के पीछे किस साजिश की ओर इशारा कर रहे अरविंद केजरीवाल

Amanat Ansari 09 Oct 2025 01:17: PM 2 Mins
CJI पर हमले के पीछे किस साजिश की ओर इशारा कर रहे अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली: पूर्व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश एक पूर्वनियोजित साजिश थी. उनका दावा है कि इसका मकसद दलितों और पूरी न्यायपालिका को डराना-धमकाना था. आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने वीडियो बयान में कहा कि CJI गवई पर हमला और उसके बाद की धमकियां दलितों और पूरी न्यायपालिका को दबाने-डराने की साजिश हैं.

केजरीवाल का बयान इस हफ्ते की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा वकील राकेश किशोर को तुरंत निष्कासित करने के कुछ घंटों बाद आया. किशोर ने CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. एसोसिएशन ने उनका एंट्री कार्ड रद्द कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में घुसने से रोक दिया. निलंबन नोटिस में बार एसोसिएशन ने कहा कि ऐसा घिनौना, बेकाबू और गुस्सैल व्यवहार कोर्ट के अधिकारी के लिए बिल्कुल अनुचित है.

यह प्रोफेशनल एथिक्स, कोर्ट की शालीनता और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है. एक्स पर पोस्ट किए वीडियो में केजरीवाल ने कहा कि घटना के बाद CJI को सोशल मीडिया पर तरह-तरह की गालियां और धमकियां मिलीं, फिर भी जूता फेंकने वाले आरोपी या धमकी देने वालों पर कोई तुरंत कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित, व्यवस्थित अभियान का संकेत देता है. पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि हमले की कोशिश और कार्रवाई न होने से दलित समुदाय और न्यायपालिका को संदेश भेजा जा रहा है.

उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि जस्टिस गवई दलित समुदाय से हैं, और कुछ लोग यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे कि मेहनत और लगन से कोई दलित सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बन जाए. क्या ये कार्रवाइयां दलित समुदाय को डराने-अपमानित करने के लिए हैं? आम दलितों को न्याय की तलाश में यह क्या संदेश देता है? क्या इससे दलितों के खिलाफ पूर्वाग्रह रखने वालों को हौसला मिलता है?.

न्यायपालिका को भेजे संदेश पर टिप्पणी करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगर CJI पर हमला करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो निचली अदालतों के जजों की रक्षा कौन करेगा? ऐसी घटनाएं जजों को न्याय के लिए फैसले देने या बोलने से डरा सकती हैं. क्या यह पूरी न्यायपालिका को डराने-कंट्रोल करने की जानबूझकर कोशिश है? घटना की निंदा करते हुए आप नेता ने हमलावर पर सख्त सजा की मांग की, साथ ही सोशल मीडिया पर CJI गवई को धमकाने-गाली देने वालों पर भी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग, मीडिया और विपक्ष को निशाना बनाने के बाद अब न्यायपालिका को चुप कराने की कोशिश लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की चिंताजनक कोशिश है.

बता दें कि चीफ जस्टिस को मध्य प्रदेश में क्षतिग्रस्त विष्णु मूर्ति को बहाल करने की याचिका सुनते हुए उनके विवादास्पद बयान देवता से खुद जाकर पूछ लो पर व्यापक आलोचना मिली थी. घटना पर कोई पछतावा न होने का दावा करते हुए राकेश किशोर ने कहा कि हमला चीफ जस्टिस के व्यवहार पर प्रतिक्रिया था. 16 सितंबर को CJI के कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल हुई. CJI ने इसका मजाक उड़ाया और कहा कि जाकर मूर्ति से प्रार्थना करो और उसे खुद अपना सिर बहाल करने को कहो... जब सनातन धर्म से जुड़ा मामला आता है, तो सुप्रीम कोर्ट ऐसे आदेश देता है. याचिकाकर्ता को राहत न दो, लेकिन उसका मजाक भी न उड़ाओ. मुझे दुख हुआ. मैं नशे में नहीं था. यह चीफ जस्टिस के काम पर मेरी प्रतिक्रिया थी. मुझे डर नहीं लगता.

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