हफ्ते का पहला दिन शेयर बाजार के लिए कुछ खास कमाल नहीं कर पाया। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर एशियन पेंट्स के शेयरों में लगभग 4% की महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई जो कि निफ्टी 50 के भीतर सबसे बड़ी गिरावट है। 22 फरवरी को ग्रासिम के पेंट कारोबार में प्रवेश करने के बाद से एशियन पेंट्स के लिए यह मंदी लगातार बनी हुई है।
हाल ही में ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने एशियन पेंट्स को डाउनग्रेड किया है। सीएलएसए ने पहले स्टॉक को "खरीदें" रेटिंग दी थी, अब इसे घटाकर "बेचें" कर दिया है।
इसके साथ एशियन पेंट्स के टारगेट प्राइस में महत्वपूर्ण कटौती हुई है जोकि ₹3,215 से घटकर ₹2,425 हो गया है।
सीएलएसए के विश्लेषण से पता चलता है कि हालिया उथल-पुथल के बीच एशियन पेंट्स अभी भी मार्केट लीडर के रूप में उभर सकता है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं है। हालांकि ब्रोकरेज कंपनी को एशियन पेंट्स की संभावित डी-रेटिंग की आशंका है, जिससे इसके 15-वर्षीय औसत गुणक में वापसी की उम्मीद है। इसी के चलते, सीएलएसए ने वित्तीय वर्ष 2025 और 2026 के लिए अपने आय अनुमानों को समायोजित किया है, जिससे उन्हें क्रमशः 8% और 10% कम किया गया है।
हालाँकि गोल्डमैन सैक्स ने एशियन पेंट्स के लिए अपनी "तटस्थ" रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन उसने अपने टारगेट प्राइस को ₹3,300 से घटाकर ₹2,850 कर दिया है। इसके विपरीत, मैक्वेरी ने एशियन पेंट्स के लिए अपनी "आउटपरफॉर्म" रिक्मेंडेशन को बरकरार रखते हुए ₹4,000 का मूल्य टारगेट प्राइस निर्धारित किया है।
एशियन पेंट्स को कवर करने वाले 37 विश्लेषकों में से 16 अब "सेल" या समकक्ष रेटिंग रखते हैं, 12 "होल्ड" की सलाह देते हैं और शेष नौ "खरीद" रेटिंग बनाए रखते हैं।