नई दिल्ली : 2026 के विधानसभा चुनावों ने देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है. कई राज्यों में दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा, तो कई नए चेहरे जीत के साथ राजनीति के केंद्र में आ गए. इस बार के नतीजों ने साफ कर दिया कि मतदाता बदलाव के मूड में थे और उन्होंने परंपरागत समीकरणों को तोड़ते हुए वोटिंग की.
असम में कांग्रेस के बड़े नेता गौरव गोगोई को बड़ा झटका लगा. जोरहाट विधानसभा सीट पर उन्हें भाजपा उम्मीदवार ने हरा दिया. गौरव गोगोई की हार को कांग्रेस के लिए असम में बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वे राज्य में पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. तमिलनाडु में सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला.
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन डीएमके अपनी सीट बचाने में असफल रहे. डीएमके के लिए यह हार सिर्फ एक नेता की हार नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते जनमत का संकेत है. इसी चुनाव में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया. विजय की पार्टी ने कई दिग्गज नेताओं को हराकर तमिलनाडु की राजनीति में नई ताकत के रूप में एंट्री की है.
केरल में भी जनता ने बड़ा संदेश दिया. वाम मोर्चा सरकार यानी एलडीएफ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के 13 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. यह नतीजा केरल में सत्ता विरोधी लहर को दिखाता है. राज्य में हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन की परंपरा इस बार भी कायम दिखी. सबसे ज्यादा नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी रहीं, जहां भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता सुवेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली. 15 राउंड की गिनती के बाद ममता बनर्जी मामूली बढ़त बनाए हुए हैं.
भवानीपुर सीट सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि बंगाल की सियासत का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई है.
वहीं पूरे पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बड़ा उछाल दर्ज किया है. दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस को कई सीटों पर कड़ी चुनौती मिली. इन चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि 2026 का विधानसभा चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का चुनाव नहीं रहा, बल्कि कई राज्यों में राजनीतिक युग परिवर्तन का संकेत बन गया. कहीं पुराने चेहरे हार गए, तो कहीं नए दल और नए नेता जनता की उम्मीद बनकर उभरे.