ईरान में 21वीं सदी का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार होने वाला है. खामेनेई के खानदान की तीन पीढ़ियां एक साथ दफन हो रही हैं. पूरा ईरान शोक मना रहा है. 100 देशों के लोग विदाई देने पहुंचे हैं. 1 करोड़ से ज्यादा ईरानी बदले की मांग कर रहे हैं. 86 साल के अली खामेनेई और 14 महीने की नातिन जाहरा एकसाथ दफनाए जा रहे हैं. मौत के 4 महीने बाद ये अंतिम संस्कार हो रहा है. खामेनेई का कद इस बात से समझना होगा. उनके अंतिम संस्कार के लिए पूरा ईरान थम गया है. सड़कों पर काले लिबाज में लोगों का हुजूम है. लेकिन इस सबके बीच ऊनके बेटे मोजतबा खामेनेई नजर नहीं आते, मोजतबा को पिता की विरासत में सर्वोच्च लीडर की कुर्सी तो मिली. लेकिन अपने पिता के जनाजे को कंधा देने का मौका शायद उनके नसीब में नहीं था. अब इसे इजरायल का खौफ कहें या वजह कुछ और है? मार्च के महीने में अंतिम संस्कार होना था. लेकिन अमेरिका-इजरायल ने अटैक भीषण कर दिया. नजीजा 4 महीने तक सर्वोच्च लीडर का अंतिम संस्कार नहीं हो सका. लेकिन अब इस अंतिम संस्कार पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. ईरान की खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं. हर तरफ अलर्ट मोड जारी है. वहां इजरायल का खौफ फैला हुआ है. इसके कई मजबूत दावे भी हैं कि इजरायल जनाजे को भी निशाना बना सकता है. ईरान की खुफिया रिपोर्ट दावा करती है.
इजरायल जनाजे की भीड़ को निशाना बना सकता है, क्योंकि वहां उस वक्त ईरान की पूरी जमात मौजूद होगी. खुफिया एजेंसियों से लेकर IRGC का बचा कुचा नेतृत्व भी मौजूद होगा. ऐसे में एक ही झटके में सबको खत्म करना आसान हो जाएगा. क्योंकि पहले भी ईरान ने इजरायल पर आरोप लगाया था. 28 फरवरी 2026 की सुबह करीब 11 बजे मीनाबा शहर के शजरेह तैयबा एलीमेंट्री स्कूल पर हमला हुआ था. इसमें 157 बच्चियों की जान गई थी. जबकि करीब 100 लोग घायल हुए थे.
इसी हमले से सबक लेकर ईरान अभी भी अलर्ट मोड में है... ईरान को डर है कि कहीं सुपुर्द ए खाक के समय हमला ना हो जाए. अगर ऐसा होता है तो लाखों लोगों की जान जा सकती है. दूसरी तरफ अमेरिका है. जो अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर तंज कसते हुए ऐलान कर दिया है. उनका कहना है
"अमेरिका ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है. ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने मानवता के नाते ऐसा किया है. कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी."
हालांकि ट्रम्प ने फिलहाल किसी भी हमले से इनकार किया है. लेकिन ईरान को इजरायल के ऊपर भरोसा नहीं है. नेतन्याहू अपने दुश्मनों को मिटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. दुनियाभर के 100 देशों के प्रतिनिधियों को बुलाने के पीछे भी यही रणनीति नजर आती है. क्योंकि ईरान को पता है कि अगर इतने सारे देशों के लोग मौजूद होंगे. तो इजरायल इतनी आसानी से हमला नहीं करेगा. अगर हमला किया, और इस हमले में बाकी देशों को नुकसान पहुंचा तो तीसरा विश्व युद्ध भी छिड़ सकता है. हमले का शिकार बने देश ईरान के साथ खुलकर आ सकते हैं. लेकिन भारत-चीन और रूस जैसे बड़े देशों ने अपनी टॉप लीडरशिप को ईरान नहीं भेजा. ईरान की सड़कों पर अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी हो रही है. शिया परंपरा के मुताबिक लोगों ने काले कपड़े पहने हैं. छाती पीटकर मातम मना रहे हैं. सड़कों पर महिलाएं बदला मांग रही हैं. हाथ में ट्रम्प का पोस्टर लेकर उस पर लिखा है ‘खून बहेगा’. दूसरी तरफ ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘बदला, बदला’ जैसे नारे भी जमकर लग रहे हैं. लेकिन इस सबके बीच मोजतबा अभी भी गायब हैं. वो पिता को कंधा देने के लिए भी बाहर नहीं आए.