Ayodhya Ram Mandir : आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह सबूतों का पुलिंदा लेकर राम मंदिर चंदा चोरी के लिए गठित एसआईटी के पास पहुंचे. कमिश्नर विजय विश्वास पंत को वो लेटर सौंपते हैं, जिसमें कुल 11 प्वाइंट में अनिल मिश्रा से लेकर सुल्तान अंसारी और चंपत राय समेत तमाम लोगों के नाम हैं. सबूत सौंपने के बाद संजय सिंह कहते हैं मैं ओरिजनल कागज लेकर आया हूं. इनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं है. एसडीएम अयोध्या खुद लिखकर दे रहे हैं कि यह जमीन नजूल की जमीन है तो कैसे इस जमीन को 24 करोड़ में खरीदा गया. यह तो सीधे ट्रस्ट के पैसों में चंदा चोरी की डकैती है.
संजय सिंह ने जो सबूत सौंपे हैं उसमें लिखा हैं कि हरीश-कुसुम पाठक से ट्रस्ट ने 4.97 करोड़ की जमीन 8 करोड़ में खरीदी, इसमें जो गवाह हैं, उनमें ऋषि कुमार उपाध्याय और अनिल मिश्रा हैं. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य हैं और ऋषि कुमार उस समय भाजपा के मेयर थे. 2021 में सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने जो जमीन हरीश-कुसुम पाठक से खरीदी, उसे 5 मिनट बाद ही साढ़े 18 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दिया गया. मजेदार बात यह है कि दोनों खरीद में अनिल मिश्रा और ऋषि कुमार उपाध्याय गवाह हैं.
ऋषि उपाध्याय के भतीजे ने 20 लाख में जमीन खरीदी, जिसे 7 महीने बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बेचा गया. 14 मई 2020 को ऋषि उपाध्याय के भतीजे दीपनारायण को दान में जमीन मिली. वह जमीन चंपत राय को 1 करोड़ में बेची गई. 20 मई 2021 को ब्रज मोहन दास से 92.50 लाख की जमीन 5.60 करोड़ रुपये में चंपत राय ने खरीदी. 51.80 लाख की जमीन कितने में बेची गई, यह पता नहीं है, लेकिन इसे भी चंपत राय ने खरीदा था.
45 लाख की जमीन कितने में बेची गई, इसकी भी जानकारी नहीं है. यह जांच का विषय है. 16 नवंबर 2023 को 9 करोड़ की जमीन 55.47 करोड़ में खरीदी गई.
2 अप्रैल 2024 को 2.92 करोड़ की जमीन चंपत राय को 24 करोड़ में बेची गई. संजय सिंह ये तक दावा करते हैं कि 1 करोड़ की जमीन दान में बेच दी गई, इसके अलावा 9 करोड़ की जमीन 55.47 करोड़ में बेची गई. इसी तरह 3 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में बेची गई. 3 करोड़ वाली जमीन जो बेची गई, वह नजूल की जमीन थी. यह जमीन न बेची जा सकती है और न ही खरीदी जा सकती है, अब इन आरोपों पर एसआईटी क्या पता लगाती है.
देखने वाली बात होगी. फिलहाल ख़बर ये भी है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले की शिकायत अयोध्या के एक बीजेपी नेता ने पीएमओ में की, और उस पर पीएमओ ने जानकारी मांगी तो जिला प्रशासन को ट्रस्ट ने ये कहकर मना कर दिया कि अभी एसआईटी की जांच चल रही है, जिसे लेकर भी कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ट्रस्ट जानकारी क्यों नहीं दे रहा, जबकि ट्रस्ट जांच का हवाला दे रहा है.