नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक से बाहर निकलने के कुछ महीनों बाद अब इराक भी सऊदी अरब-प्रधान संगठन से अलग होने की चेतावनी दे रहा है. इराक, ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश, अपनी उत्पादन सीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहा है. अगर मांग नहीं मानी गई तो वह संगठन छोड़ने का फैसला ले सकता है.
इराकी अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान कोटा देश की उत्पादन क्षमता और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है. इराक का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्पादन को 70 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाना है. देश वर्षों के युद्ध, प्रतिबंधों और हालिया US-Iran संघर्ष से जर्जर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अधिक तेल राजस्व चाहता है.
UAE के अप्रैल में निकलने के बाद ओपेक+ पहले ही कमजोर हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि इराक का संभावित एक्जिट संगठन की वैश्विक तेल बाजार पर पकड़ को और कमजोर करेगा, जिससे तेल की कीमतों में अस्थिरता और भावी मूल्य युद्ध का खतरा बढ़ सकता है. ट्रस्ट की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.