नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनी की मौत के बाद भारत एक बार फिर कूटनीतिक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खामेनी के राज्य स्तरीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है, जिससे नई दिल्ली के सामने संवेदनशील दुविधा खड़ी हो गई है. खामेनी की मौत फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल के हमलों में हुई थी. उनका अंतिम संस्कार 4 से 9 जुलाई के बीच तेहरान, कुम और मशहद में होगा.
भारत की क्या है दुविधा?
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी खुद ईरान नहीं जाएंगे. भारत उच्चस्तरीय प्रतिनिधि भेजने पर विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है. मई 2024 में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत पर भारत ने राष्ट्रीय शोक घोषित किया था और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अंतिम संस्कार में भेजा था.
विदेश नीति विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा है कि यह भारत के लिए बेहद नाजुक कूटनीतिक स्थिति है. उच्चस्तरीय प्रतिनिधि भेजने से भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का संदेश देगा, लेकिन इससे वाशिंगटन और तेल अवीव नाराज भी हो सकते हैं.
भारत दुनिया की सबसे बड़ी शिया आबादी वाला देश है (ईरान के बाद), इसलिए यह मुद्दा घरेलू संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है. अंतिम फैसला आने वाले दिनों में होने की उम्मीद है. यह फैसला भारत की बहुआयामी विदेश नीति की परीक्षा होगा.