Ayodhya Ram Mandir : चंदा चोरों की एक टोली पकड़ ली गई है. दूसरी टोली हो सकता है कुछ दिन बाद पकड़ ली जाए, लेकिन क्या प्यादों को पकड़कर बड़े चेहरों को बचा दिया गया. आखिर जिन लोगों को पकड़ा गया, उनका काम क्या था, इसकी पूरी कुंडली अब खुल चुकी है. इस लिस्ट में पहला नाम है सुभाष चंद्र श्रीवास्तव. राम मंदिर चंदा चोरी में फंसा सुभाष चंद्र श्रीवास्तव एसबीआई से रिटायर्ड बैंक कर्मी है. राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे वाले नोट गिनने की पूरी प्रक्रिया का इंचार्ज सुभाष को बनाया गया था. यानि कैश काउंटिंग सेंटर के स्टाफ की निगरानी करने की मुख्य जिम्मेदारी थी, ताकि कोई गड़बड़झाला न हो, पर ये गड़बड़झाले में ही खुद ही धर लिए गए.
लवकुश मिश्रा अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले तमाम चढ़ावा और नकदी को गिनने वाली टीम में शामिल था. लवकुश मिश्र मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गिनने का काम करता था, लेकिन गिनते-गिनते इसने अपने घर पर लाखों पहुंचा दिए, छापा पड़ा तो लवकुश के घर से 10 लाख रुपये मिले.अनुकल्प मिश्रा ये करीब दो साल मंदिर में चढ़ावे वाले रुपये को गिनने का काम कर रहा था. श्रद्धालुओं की मदद के लिए बने सुविधा सेंटर में तैनाती थी, लेकिन अब इस पर चढ़ावा के वाउचर में गड़बड़ी करने का आरोप है. ये लवकुश मिश्रा का रिश्ते में साला लगता है. यानि जीजा-साले ने मिलकर भगवान के घर को भी नहीं छोड़ा.
मनीष यादव ये राम मंदिर के दानपात्रों में चढ़ाए गए. चढ़ावे में नकली नोट निकालने और उसे गिनकर अलग रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे. लेकिन नकली के बहाने असली नोटों का घपला कब कर दिया, किसी को पता ही नहीं चला. अविनाश शुक्ला इसका काम राम मंदिर में चढ़ावे वाले पैसे और नकदी को दान पात्रों से निकालने और धनराशि को गणना कक्ष तक ले जाने का काम था. ये गिनती करने वाली टीम में भी शामिल था. पर अविनाश शुक्ला ने गिनते-गिनते श्रद्धालुओं की आस्था पर डकैती डाल दी.
करुणेश पांडेय इसका काम मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों का गणना कक्ष तक पहुंचाने का रोल था, लेकिन ये उसकी गिनती भी करता, और उसी से पैसा चुराने के आरोप में अब सलाखों के पीछे है. रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के का ड्राइवर और करीबी कहा जा रहा है. इसका काम व्यवस्थापक की तरह था, यानि मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन कराने से लेकर जनसुविधाओं का ध्यान रखना था. पर इसकी हनक इतनी थी कि ये अकेला ऐसा शख्स था, जो बेरोकटोक मंदिर में कही आ जा सकता है. टुन्नू यादव की बुलेट बाइक मंदिर के अंदर जाकर खड़ी होती थी. इसने दानपात्रों की देखरेख के नाम पर खेल किया.