इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार के इस निर्णय और पंचायत चुनाव टालने को असंवैधानिक बताते हुए अपना आदेश जारी किया। इस मामले की सुनवाई अरविंद राठौर द्वारा दायर याचिका पर हुई।
उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया और ग्राम पंचायत चुनाव स्थगित कर दिए। इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाए जाने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की टाइमलाइन मांगी है। मामले की अगली सुनवाई अब 13 जुलाई 2026 को होगी।
ग्राम पंचायत चुनाव में देरी का मुख्य कारण मतदाता सूची को बताया जा रहा है, जिसे 12 जून को प्रकाशित किया जाना था। वहीं, पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की भी तैयारी की जा रही थी। अदालत ने नवंबर-दिसंबर तक का समय अधिक बताते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मार्च में विधानसभा चुनाव कराए जाने से पहले पंचायत चुनाव कराना प्रशासन के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।