नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से यह दावा तेजी से वायरल हो रहा था कि उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को 5 साल की प्रतिनियुक्ति पर पश्चिम बंगाल भेज दिया गया है. हालांकि, जांच में यह दावा पूरी तरह भ्रामक और फर्जी निकला. अब तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश गृह मंत्रालय या कार्मिक विभाग की ओर से जारी नहीं किया गया है. जानकारी के मुताबिक अजय पाल शर्मा फिलहाल उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं और उनकी मूल तैनाती प्रयागराज में ही बनी हुई है.
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा को विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया था. उन्हें दक्षिण 24 परगना समेत संवेदनशील इलाकों की कानून-व्यवस्था पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई थी. यह तैनाती केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित थी, न कि किसी स्थायी ट्रांसफर या लंबी प्रतिनियुक्ति का हिस्सा.
बंगाल में उनकी तैनाती के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें अजय पाल शर्मा मतदान के दौरान गड़बड़ी और हिंसा फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते नजर आए. वीडियो सामने आते ही मामला राजनीतिक रंग ले गया. तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने उन पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया. टीएमसी नेताओं का कहना था कि एक चुनाव पर्यवेक्षक को इस तरह सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया पर अजय पाल शर्मा को लेकर टिप्पणी की थी. वहीं पार्टी नेता कुणाल घोष ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई, इसके बाद मामला और गरमा गया. विवाद इतना बढ़ा कि उनकी नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक दाखिल कर दी गई. याचिका में मांग की गई कि अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए, क्योंकि उनका रवैया कथित रूप से निष्पक्ष नहीं दिख रहा. हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच भी उन्हें लेकर 5 साल की प्रतिनियुक्ति वाली खबरें केवल अफवाह साबित हुईं.
जानकारों का कहना है कि किसी भी आईपीएस अधिकारी को दूसरे राज्य में लंबी अवधि की प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए केंद्र, मूल राज्य सरकार और संबंधित राज्य सरकार के बीच लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है. यह प्रक्रिया रातोंरात संभव नहीं है. ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल दावा शुरू से ही संदिग्ध था. फिलहाल स्पष्ट है कि अजय पाल शर्मा बंगाल में सिर्फ चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निभाने पहुंचे थे. चुनाव खत्म होने के बाद उनकी मूल कैडर पोस्टिंग उत्तर प्रदेश में ही बनी हुई है.