गांव में अपना साम्राज्य चलाने वाला मोईन खान पुलिस कस्टडी में भीगी बिल्ली बना बैठा है, कोई गेट खोलता है तो आवाज सुनकर ही डर जाता है, तोते की तरह वो अपने हर गुनाह पुलिस के डंडे के डर से खुद ही उगलने लगा है, यहां तक कि लड़की को क्या कहकर डराया था, ये तक बता देता है, और लड़की के साथ जो किया, जिस डीएनए रिपोर्ट की बात अखिलेश यादव कर रहे हैं, उस डीएनए रिपोर्ट के पहले ही वो ये मान रहा है कि हमसे गलती हुई है, क्योंकि उसे पता है अभी अगर सच नहीं बताया, रिपोर्ट में पोल खुली तो फिर कुछ भी हो सकता है.
मोईन खान का कबूलनामा...
मैं मोईन खान, बेकरी की दुकान चलाता हूं, जिस लड़की ने मेरे ऊपर आरोप लगाए हैं, मैं उसे जानता हूं, वो मजदूरी करती है, वो चार बहन और एक भाई है, मेरे दुकान पर बराबर आती-जाती थी, हमने उसे कहा था कि मामला रफा-दफा कर लो, पैसे देने को भी तैयार था, लेकिन वो नहीं मानी. वो ये भी बताता है कि गांव में तालाब की जमीन जो पट्टे पर मिली थी, उस पर हमने दुकान बनाया, कोई बोलने वाला नहीं था, क्योंकि मैं अपने इलाके के हर नेता को न सिर्फ जानता था बल्कि उनसे दोस्ती से भी ऊपर का रिश्ता था, तभी तो मोईन जब जेल जाता है.
उसे बचाने के लिए दो सपा नेता राशिद और जय सिंह राणा अस्पताल पहुंच जाते हैं, वहां लड़की को जाकर कहते हैं शिकायत वापस ले लो वरना ठीक नहीं होगा, जबकि ऐसे वक्त में हर किसी को उस लड़की की पीड़ा और मनोदशा को समझना चाहिए, पर मोईन खान और उसके दोस्त जैसे लोग इस बात को शायद कभी नहीं समझेंगे, और सिर्फ उसके दोस्त ही क्यों शायद सपा मुखिया अखिलेश यादव को भी ये बात ठीक से समझ नहीं आ रही है, तभी तो निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, आरोपी के डीएनए टेस्ट की मांग कर रहे हैं, बकायदा इसके लिए वो घटना के दो दिन बाद ट्वीट करते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या आरोप झूठे हैं, क्या अखिलेश यादव को लगता है कि जिस पिछड़ा वर्ग की वो सियासत करते हैं.
उस पिछड़ा वर्ग से आने वाली ये लड़की झूठ बोल रही है, आखिर उसकी भी तो बदनामी होगी, फिर वो ऐसे आरोप क्यों लगाएगी, अयोध्या से सांसद अवधेश पासी जिन्हें इस लड़की का साथ देना चाहिए था, वो ये तो कहते हैं कि इसे आर्थिक मदद दी जानी चाहिए, लेकिन साथ में अखिलेश वाली बात भी दोहराते हैं, तो सवाल है कि क्या सपा अंदर ही अंदर मोईन खान को बचाने का प्लान बना रही है.
आरोपी कोई भी हो, उसे कितनी सजा मिलेगी, वो दोषी है या नहीं ये तय करना अदालत का काम है, फिर डीएनए टेस्ट की बात कहां से आई, टेस्ट तो पुलिस वैसे भी करवाएगी और मायावती जैसी नेता जब ये पूछती हैं कि सपा सरकार में कितने आरोपियों के डीएनए टेस्ट हुए तो लगता है कोई तो है जो निष्पक्ष तौर पर महिलाओं की आवाज उठाना चाहता है. मायावती अपने कार्यकाल में महिला सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त थीं और अब योगीराज महिलाओं को सुरक्षा देने का संकल्प ले चुके हैं, इसलिए आरोपी चाहे किसी मत-मजहब या पार्टी से जुड़ा हो, उसे पकड़ा भी जाएगा और सजा भी मिलेगी.
मोईन खान जैसे लोग इस समाज के लिए वो कोढ़ हैं, जिनका इलाज ढंग से नहीं हुआ तो इन्हें फैलने में वक्त नहीं लगेगा. ये बात खुद योगी आदित्यनाथ सदन में कह चुके हैं. तो सवाल उठता है कि सपा ऐसे लोगों को बचाना क्यों चाहती है, सीधे तौर पर ये क्यों नहीं कहती कि बेकरी दुकान पर बुलडोजर चलाकर अच्छा किया, मोईन खान को जेल भेजकर अच्छा किया, हम उस लड़की को इंसाफ दिलाकर रहेंगे, क्या अखिलेश तब भी डीएनए टेस्ट की बात करते, जब आरोपी किसी और पार्टी या जाति से जुड़ा होता. जवाब ठीक से सोचकर कमेंट में जरूर लिखिए, क्योंकि सवाल बहन-बेटियों की सुरक्षा का है.