नई दिल्ली: बहराइच की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को पिछले साल 13 अक्टूबर के दुर्गा विसर्जन हिंसा मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया. 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने वाले मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ रिंकू को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि उसके पिता अब्दुल हमीद, दो भाइयों समेत कुल 9 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा हुई.
घटना महाराजगंज क्षेत्र में उस समय हुई थी जब विसर्जन जुलूस के दौरान रामगोपाल एक मकान की छत पर भगवा झंडा फहराने चढ़े थे. विवाद के बाद भीड़ ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं. गोली लगने से रामगोपाल की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक तनाव फैल गया था. 9 दिसंबर को कोर्ट ने 13 आरोपियों में से 10 को दोषी ठहराया था और तीन को बरी कर दिया था. आज सजा के ऐलान पर कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा.
रामगोपाल के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया, लेकिन मां और पत्नी ने सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग दोहराई. पिता ने कहा कि न्याय मिला, लेकिन मेरा बेटा वापस नहीं आएगा. मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मॉनिटर किया था और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे. कई आरोपियों पर NSA भी लगाया गया था.