नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इस बार आरोप लगाने वाले कोई बाहरी नहीं, बल्कि खुद BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिवा रेड्डी हैं. रेड्डी ने शनिवार को मिश्रा को छह पन्नों का पत्र लिखकर 15 दिनों के अंदर इस्तीफा देने की मांग कर दी है.
रेड्डी ने पत्र में BCI को “किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति” बताने से इनकार करते हुए कहा कि यह संसद के कानून से बनी वैधानिक संस्था है और इसके फंड का इस्तेमाल पूरे देश के लाखों अधिवक्ताओं के हित में होना चाहिए. रेड्डी का सबसे गंभीर आरोप है कि BCI के करीब 150 करोड़ रुपए के फंड को “BCI ट्रस्ट PEARL-First” नाम के नए ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया चलाई गई.
उनके मुताबिक, पहले से मौजूद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट को निष्क्रिय कर 17 सितंबर 2020 को यह नया ट्रस्ट बनाया गया, जिसके ट्रस्टी मनन मिश्रा की पसंद के लोग थे. रेड्डी ने सवाल उठाया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत वैधानिक संस्था का पैसा निजी ट्रस्ट में डाला जा सके. उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट की ट्रस्ट डीड तक सदस्यों के सामने नहीं रखी गई.
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि BCI से मान्यता या नवीनीकरण चाहने वाले लॉ कॉलेजों पर PEARL-First ट्रस्ट को 25 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का “योगदान” देने का दबाव बनाया जाता है. रेड्डी ने कहा कि नियामक शक्ति का इस्तेमाल फंड जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता और ऐसे सभी भुगतान तुरंत रोके जाएं. रेड्डी ने BCI स्टाफ की नियुक्तियों को लेकर भी तीखा हमला बोला. उनके अनुसार, कर्मचारियों में बड़ी संख्या में मनन मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से जुड़े लोग और परिवार के सदस्य शामिल हैं.
उन्होंने दावा किया कि इन नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन, चयन समिति की कार्यवाही या मेरिट लिस्ट रिकॉर्ड में नहीं मिली. हालिया NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ विवाद को भी रेड्डी ने प्रमुखता दी. 13 अगस्त को BCI ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि 2026 में NALSAR से ग्रेजुएट होने वाले छात्रों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन न किया जाए. इस कार्रवाई को भी इस्तीफे की मांग से जोड़ा गया है.
रेड्डी ने लिखा कि वे करीब एक दशक से मिश्रा के साथ काम कर चुके हैं और बैठकों में जो कुछ देखा, उसके आधार पर अब चुप नहीं रह सकते. उन्होंने मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने की अपील की है. यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब मनन मिश्रा पहले से ही NALSAR विवाद और कुछ अधिवक्ताओं के इस्तीफे की मांग को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. अब देखना होगा कि BCI चेयरमैन इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और परिषद में आगे क्या होता है.