कन्नौज: शुक्रवार की रात कन्नौज के बोर्डिंग ग्राउंड पर भक्ति का सैलाब उमड़ा था. हरदोई के बिलग्राम से आए हजारों कांवड़िए सिद्धपीठ गौरीशंकर मंदिर में गंगाजल चढ़ाने निकले थे. डीजे की धुनें गूंज रही थीं, बम बम भोले के नारे लग रहे थे, लेकिन जैसे ही पुलिस ने शहर के अंदर डीजे ले जाने से रोका, माहौल बदल गया. बात कहासुनी से शुरू हुई और धक्का-मुक्की तक आ गई.
UP police inspector resigns in front of Kanwariyas
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) August 22, 2026
"मैं जितेंद्र प्रताप सिंह वल्द श्री राम कुमार सिंह, और वर्तमान में इंस्पेक्टर कोतवाली के पद पर तैनात हूं। ईश्वर इस बात का साक्षी है कि अगर मैने किसी कावड़िया का अपमान किया है तो ईश्वर न्याय करेगा.. अगर आपकी आस्था को चोट पहुंची… https://t.co/ualubA2U8I pic.twitter.com/tzkrPDeL9T
कुछ श्रद्धालुओं ने मारीपट और अभद्रता के आरोप लगाए. इसके बाद नाराज कांवड़िए सड़क पर बैठ गए. यातायात ठप हो गई. मंच से ऐलान हुआ, जब तक कोतवाल सस्पेंड नहीं होते, जलाभिषेक नहीं होगा. ढाई घंटे तक हंगामा चला. सिस्टम को समझ आ गया कि आस्था के आगे नियम अकेले नहीं टिकते. एडीएम देवेंद्र सिंह हाथ जोड़कर कांवड़िया प्रतिनिधियों के सामने खड़े हो गए.
पुलिस की ओर से माफी मांगी और कोतवाली प्रभारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भरे मैदान से माइक पर ऐलान किया, ''मैं इस्तीफा दे दूंगा. अगर गलती की है तो ईश्वर न्याय करेगा. मुझसे बड़ा सनातनी हो तो सिद्ध करे!'' यह सिर्फ एक घटना नहीं थी. यह योगी आदित्यनाथ के सनातन मॉडल की नींव का जीवंत प्रमाण था. जहां आस्था को दबाया नहीं जाता, बल्कि सिस्टम खुद उसके सामने झुक जाता है.
जहां कांवड़ियों की गरिमा प्रशासन की मजबूरी नहीं, बल्कि शासन की नीति बन चुकी है. जिलाधिकारी और एसपी भी पहुंचे. बातचीत हुई. आखिरकार डीजे को शहर के अंदर अनुमति मिल गई. रात साढ़े दस बजे कांवड़िए फिर से यात्रा लेकर रवाना हो गए. गौरीशंकर मंदिर की ओर भक्ति की वही धुनें गूंजने लगीं.