लेखक- अभिषेक चतुर्वेदी
जहां सीबीआई का दिमाग भी चकरा जाए, जहां ईडी के अधिकारी भी फाइलें नहीं खंगाल पाते हैं, वहां एक ऐसी एजेंसी की एंट्री होती है, जो नदी-तालाब, पहाड़-पाताल कहीं से भी सबूत ढूंढ लाती है और कोलकाता केस में एक ऐसी ही एजेंसी की एंट्री होने वाली है. जिसका नाम सुनते ही ममता बनर्जी की सरकार हिल गई है, क्योंकि उन्हें पता है अगर ये वाली अधिकारी आ गए तो फिर सच्चाई को बाहर आने से कोई रोक नहीं पाएगा. इन्हें कोई फाइल दे या न दे, ये अपनी जांच अलग तरीके से करते हैं, ये सीबीआई की तरह सुप्रीम कोर्ट में जाकर ये नहीं कहेंगे कि हमें सुराग नहीं मिला, बल्कि सीधा सबूत जुटाकर फाइल में लिखेंगे, यहां बड़ा खेल चल रहा था. आप ये जानकर शायद हैरत में पड़ जाएं कि इस टीम ने 3 साल पहले ही आरजीकर मेडिकल कॉलेज और संदीप घोष की शातिर कुंडली खोल दी थी, इस टीम का नाम है, जिसे हिंदी में कहते हैं भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कैग ने आरजीकर मेडिकल कॉलेज को पहले भी नोटिस दिया था. अखबार लिखता है...दवाओं और मेडिकल उपकरण के खरीद की जांच जब कैग ने की तो पता चला कि आरजीकर मेडिकल कॉलेज में जीएसटी नियमों का ख्याल नहीं रखा गया. 1.3 करोड़ का अतिरिक्त खर्च नजर आया, जिसकी रिपोर्ट आरजीकर मेडिकल कॉलेज से मांगी गई तो कोई जवाब नहीं मिला. तब कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष ही हुआ करते थे.
यहां तक कि कैग ने राज्य सरकार और वहां के स्वास्थ्य विभाग से भी रिपोर्ट मांगी थी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला, यानि कॉलेज के घपले में कुछ बड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी जांच होना जरूरी है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या संदीप घोष इतना ताकतवर है कि कैग जैसी शक्तिशाली संस्था तक को सरकार ने इग्नोर कर दिया. ऐसी ख़बरें सामने आ रही है कि सीबीआई को आरजीकर मेडिकल कॉलेज में रैकेट चलने की जानकारी मिली है, ऐसे में वो कमाई कहां तक जाती थी, इसका भी खुलासा करना होगा. हो सकता है आने वाले दिन में इस केस में दूसरी जांच एजेंसियों की भी एंट्री हो जाए, क्योंकि संदीप घोष का बॉस कौन है, ये जानना बेहद जरूरी है और सीबीआई की टीम पॉलीग्राफ टेस्ट से इसका पता लगा सकती है. जिस हिसाब से एक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को बचाने की कहानी अब तक सामने आई है, वो साफ इशारा करती है, कोई तो सुप्रीम बॉस है, जिसके इशारे पर कोलकाता में बड़ा खेल चल रहा था, इसीलिए सीबीआई हर एंगल से केस की जांच में जुटी है.
अब पता चला है कि संदीप घोष की कार भी कई बड़े राज उगल सकती है. सीबीआई ने WB02AU9747 नंबर वाली एसयूवी को अपनी कस्टडी में लेकर जांच शुरू कर दी है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि संदीप घोष के पास ये कार कहां से आई, और इस कार का कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में हुई घटना से कोई कनेक्शन तो नहीं है.