नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए गए. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब जीएसटी अधिकारियों के पास गिरफ्तारी का अधिकार नहीं रहेगा. मुकदमा चलाने की सीमा भी एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए कर दी गई है.
काउंसिल ने रिफंड प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है. अब रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर सिर्फ 10 दिन कर दी गई है. इससे व्यापारियों को जल्दी पैसा वापस मिल सकेगा. वित्त मंत्री ने बैठक के बाद बताया कि कर्मचारियों के बीमा कवर पर चुकाए गए जीएसटी पर नियोक्ताओं को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिलेगा.
पहले कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा पर 18 प्रतिशत GST भरती थीं, लेकिन ITC का दावा नहीं कर सकती थीं. अब यह राहत मिल गई है. काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे करदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी आसान बनाई है.
नोटिस और कार्यवाही के लिए समान मानक तय करने की भी सिफारिश की गई है. जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए हर साल एक अलग बैठक होने का भी फैसला लिया गया. ये फैसले जीएसटी सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी, आसान और व्यापार-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं.