अमेरिका का बड़ा झटका! इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो समेत कई आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया

Amanat Ansari 08 Oct 2026 10:44 PM 1 Mins
अमेरिका का बड़ा झटका! इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो समेत कई आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया

नई दिल्ली: यूएस श्रम विभाग ने दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से हटा दिया है. विभाग ने इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड दिलाने के सिस्टम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. PERM वह आधिकारिक मंजूरी है जो अमेरिकी श्रम विभाग देता है, जिससे नियोक्ता विदेशियों को स्थायी ग्रीन कार्ड के लिए स्पॉन्सर कर सकता है. इसके तहत कंपनियों को यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं.

इस कार्रवाई से इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है, जो अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी नियोक्ता हैं. इससे अस्थायी वर्क स्टेटस से स्थायी रेजीडेंसी की ओर जाने वाले कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, यह कार्रवाई एच-1बी वीजा को रद्द नहीं करती और न ही कंपनियों को एच-1बी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने से रोकती है.

सस्पेंशन के दौरान नई PERM आवेदन दाखिल नहीं किए जा सकेंगे और लंबित आवेदनों को होल्ड पर रखा जाएगा. इससे कंपनियों को कानूनी, अनुपालन और प्रशासनिक खर्च भी बढ़ सकते हैं. अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की. साथ ही माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी प्रोग्राम से सस्पेंड किया गया. व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोंडरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ कहा, ''दुर्भाग्य से अमेरिका में किसी भी कंपनी ने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा दुरुपयोग नहीं किया.''

वेंस ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को निकालने के बाद भी 6,000 से ज्यादा एच-1बी वीजा और 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए. इनमें से करीब 1,000 आवेदन उन्हीं पदों के लिए थे जहां से अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला गया था. उन्होंने कहा कि एच-1बी प्रोग्राम में धोखाधड़ी भर गई है.

श्रम विभाग ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड सहित नौ विश्वविद्यालयों की भी जांच शुरू की है. आरोप है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लाकर अमेरिकी वेतन को कमजोर किया. यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के तहत आई है और अमेरिकी आईटी सेक्टर में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा सकती है. FY2023 में ग्रीन कार्ड पाने वाले भारतीयों में करीब 37% रोजगार आधारित श्रेणी से आए थे, जिसमें PERM महत्वपूर्ण कदम है.

Infosys TCS Wipro HCL Cognizant Capgemini Microsoft

Recent News