अजमेर: कभी अजमेर सेंट्रल जेल की कमान संभालने वाली पूर्व जेलर दिव्या चौधरी अब उसी जेल में कैदी बनकर पहुंची हैं. गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने के बाद अदालत के आदेश पर उन्हें अजमेर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है. दिव्या चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने जेलर पद का कथित दुरुपयोग किया. जेल में बंद दो महिला कैदियों को नियमों को दरकिनार कर जेल से बाहर ले जाया जाता था. पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाएं हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रही थीं.
आरोप है कि इन बंदियों को किसी अदालती आदेश, चिकित्सकीय जरूरत या सरकारी काम के लिए नहीं, बल्कि निजी कामों के लिए बाहर निकाला जाता था. दिव्या चौधरी के अजमेर स्थित आवास पर इन महिलाओं से घरेलू काम और सफाई कराई जाती थी. सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि दिव्या चौधरी अपनी निजी कार से महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाती थीं और जरूरी गेट एंट्री भी दर्ज नहीं कराई जाती थी.
जब ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों ने बिना वैध दस्तावेज और अनुमति के बंदियों को बाहर ले जाने पर आपत्ति जताई, तो कथित तौर पर उन्हें धमकाया गया. आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों को नौकरी से हटवाने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई. मामले की शिकायत जेल के एक गार्ड ने जुलाई में उच्च अधिकारियों से की थी. इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई.
सरकारी स्तर से अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद 5 अगस्त को दिव्या चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज की गई. दिव्या चौधरी और उनकी कथित सहयोगी जेल गार्ड सोनिया चौधरी को निलंबित कर बीकानेर सेंट्रल जेल से संबद्ध किया गया, लेकिन दोनों फरार हो गईं. पुलिस जांच में दोनों उम्रकैद की महिला बंदियों को दिव्या चौधरी के अजमेर स्थित आवास से बरामद किया गया और उन्हें वापस जेल भेज दिया गया.
करीब दो महीने तक तलाश के बाद पुलिस को दिव्या चौधरी के कोटा में होने की सूचना मिली. टीम ने एक फ्लैट पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद दिव्या चौधरी को अदालत में पेश किया गया. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट के आदेश पर उन्हें अजमेर सेंट्रल जेल भेज दिया गया. यानी जिस जेल की कभी वे प्रशासनिक कमान संभालती थीं, अब उसी जेल में वे खुद आरोपी बंदी के रूप में पहुंची हैं.