पाकिस्तानी जेट्स ने यमन में हूती ठिकानों पर बोला हमला! मक्का पैक्ट एक्टिव, सऊदी में तैनात 8,000 सैनिक

Amanat Ansari 08 Oct 2026 09:19 PM 2 Mins
पाकिस्तानी जेट्स ने यमन में हूती ठिकानों पर बोला हमला! मक्का पैक्ट एक्टिव, सऊदी में तैनात 8,000 सैनिक

नई दिल्ली: पाकिस्तान एयर फोर्स के फाइटर जेट्स अब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला कर रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सऊदी अरब के साथ हाल में एक्टिवेट हुए ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ के तहत किया जा रहा है. साथ ही सऊदी अरब में करीब 8,000 पाकिस्तानी सैनिक भी तैनात बताए जा रहे हैं. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने गुमनाम रहकर NYT को बताया कि पाकिस्तान एयर फोर्स के विमान हूती ठिकानों पर हमलों में इस्तेमाल हो रहे हैं. यह विकास पाकिस्तान की मध्य पूर्व संघर्ष में सैन्य भूमिका का बड़ा विस्तार माना जा रहा है.

CNN की रिपोर्ट में लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी (डीजी आईएसपीआर) ने पुष्टि की कि पाकिस्तानी फोर्स सऊदी अरब में मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने संख्या और क्षमताओं का खुलासा नहीं किया. इसे गोपनीय बताया गया. अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने नाटो जैसी ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे बाद में मक्का डिफेंस अलायंस नाम दिया गया. इसके तहत किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा.

इस हफ्ते रियाद में आपातकालीन बैठक के बाद पैक्ट को पहली बार व्यावहारिक रूप से सक्रिय किया गया. तीनों देशों ने सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई. अमेरिकी रक्षा विश्लेषक कर्नल डेविड ओ स्मिथ के अनुमान के अनुसार, सऊदी में लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं. इनमें एयर फोर्स और आर्मी एयर डिफेंस के कर्मी शामिल हैं, जो तेल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं. स्मिथ का कहना है कि पाकिस्तानी सैनिक सीधे जमीनी युद्ध में शामिल होने की संभावना कम है, क्योंकि इस्लामाबाद ईरान के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है.

दूसरे पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि इस्लामाबाद की भूमिका मुख्य रूप से एयर सपोर्ट के जरिए हूती मिसाइल और ड्रोन खतरे का मुकाबला करने की होगी, न कि यमन में जमीनी सेना भेजने की. पाकिस्तान की सेना ने जेट्स के इस्तेमाल पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

2015 में पाकिस्तान की संसद ने यमन युद्ध में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान से दूर रहने का फैसला किया था. अब लगभग एक दशक बाद मक्का पैक्ट के सक्रिय होने और सऊदी में फोर्स तैनाती के साथ पाकिस्तान इस संघर्ष में और गहराई से उलझता दिख रहा है. यह कदम इस्लामाबाद के लिए सऊदी के साथ रणनीतिक साझेदारी और ईरान के साथ खुले संघर्ष से बचने के बीच संतुलन बनाए रखने की परीक्षा साबित हो सकता है.

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