नई दिल्ली: ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है. कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के कम से कम 81 विमान, ड्रोन और हेलीकॉप्टर नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. इनका कुल मूल्य लगभग 3.3 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 27,700 करोड़ रुपए) बताया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ा नुकसान MQ-9 रीपर ड्रोन का हुआ है. कम से कम 45 रीपर ड्रोन नष्ट हो गए हैं. प्रत्येक ड्रोन की कीमत 3 से 5 करोड़ डॉलर के बीच है. इन ड्रोनों का इस्तेमाल निगरानी, खुफिया जानकारी और सटीक हमलों के लिए किया जाता है. इसके अलावा अमेरिका ने 12 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट भी खोए या क्षतिग्रस्त हुए.
इनमें से तीन जेट कुवैत के ऊपर फ्रेंडली फायर में गिरे, जबकि एक ईरान के ऊपर मार गिराया गया. आठ और F-15E जॉर्डन के एयरबेस पर ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त हुए, जिन्हें बाद में मरम्मत कर सेवा में वापस लाया गया. रिपोर्ट में एक F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर (कीमत 9.2 करोड़ डॉलर से अधिक) के क्षतिग्रस्त होने का भी जिक्र है.
इसके अलावा एक E-3 सेंट्रल निगरानी विमान (लगभग 27 करोड़ डॉलर), दो A-10 वॉरथॉग अटैक एयरक्राफ्ट, सात KC-135 टैंकर विमान, और कई स्पेशल ऑपरेशंस व रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी नुकसान की सूची में शामिल हैं. यह नुकसान अमेरिकी वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता पर असर डाल सकता है, खासकर ड्रोन फ्लीट पर.
मई में एक एयर फोर्स जनरल ने बताया था कि ऑपरेशनल रीपर ड्रोन की संख्या घटकर 135 रह गई है, जबकि जरूरत कम से कम 189 की है. यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क पोस्ट में उद्धृत की गई है और ईरान युद्ध में अमेरिका को हुए भौतिक नुकसान की गंभीर तस्वीर पेश करती है.