Bihar Elections 2025: बिहार में जैसे-जैसे चुनावी तारीखें नजदीक आ रही, हर पार्टी नई-नई रणनीति बना रही है, नीतीश की पार्टी जेडीयू के एक नेता ने जहां अब चिराग को सीधा चैलेंज कर दिया है कि अकेले लड़कर देख लें, तो वहीं तेजस्वी और राहुल नीतीश को अनफिट घोषित करने में लगे हैं, पर बिहार की जनता तो सब समझती है, नीतीश कुमार ने इस बार चुनाव के लिए ऐसा ऑफिसर प्लान बनाया है, जिसे सुनकर उनके विरोधियों का माथा भन्ना जाएगा, लालू यादव भी नहीं पकड़ पाएंगे कि आखिर ये हो क्या रहा है. क्योंकि बीते कुछ समय से आपने देखा होगा बिहार में इस्तीफे का दौर चल रहा था. पर उससे भी बड़ी बात ये है कि एक IAS ऑफिसर ऐसे हैं, जिनका भव्य स्वागत होता है.
नाम है दिनेश कुमार, जून महीने में राज्य के भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव बने हैं. BAS यानि बिहार प्रशासनिक सेवा से सीधा IAS बने हैं. नीतीश के करीबी भी माने जाते हैं. लेकिन पटना से जगदीशपुर, दिनारा और कोचस में इनका जैसा स्वागत हुआ, काफिले में सैकड़ों गाड़ियां थी, वो साफ बता रहा था साहब का मन सियासत की ओर मुड़ने वाला है. अपने पैतृक गांव से इसका इशारा इन्होंने कर दिया है, हालांकि इसके लिए इन्हें पद छोड़ना होगा. बीते साल दो तेजतर्रार अधिकारियों ने बिहार में पद छोड़ा भी है.
हालांकि दोनों चेहरों को लेकर ये चर्चा रही कि ये राजनीति में आ सकते हैं, फिलहाल कुछ भी पुष्टि नहीं हुई है. पर पूर्व IAS ऑफिसर जेड हसन ने इस चुनाव में उतरने का खुला ऐलान कर दिया है, उन्होंने कहा है भागलपुर की नाथनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. मुस्लिम और पिछड़े वर्ग में जेडीयू की पैठ बनाने के लिए जेड हसन सही उम्मीदवार हो सकते हैं. नीतीश कुमार की सियासत को करीब से समझने वाले लोग कहते हैं वो अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा करते हैं, अधिकारियों के साथ मिलकर ही उन्होंने बिहार की तस्वीर बदली है.
हालांकि इस बार आरसीपी सिंह क्या करेंगे, किसी को कोई अंदाजा नहीं है. चूंकि इस बार बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी भी दाव ठोंक रही है, वो खुद को एक बड़ा रणनीतिकार बताते हैं, कई चुनावों में पीके ने कमाल करके भी दिखाया है, और बीजेपी-जेडीयू के खिलाफ प्रशांत आवाज बुलंद कर रहे हैं, इसलिए एनडीए भी कई बड़े प्लान तैयार कर रही है. चुनाव के ऐलान से पहले बिहार की सियासत में अभी काफी कुछ देखने को मिल सकता है. कौन सी पार्टी और कौन सा नेता कब किसके साथ जाए, या किसका साथ छोड़ दे सियासत में कुछ भी तय नहीं होता, औऱ बिहार में तो मीडिया चैनल्स के एग्जिट पोल भी फेल हो जाते हैं, बिहार के बारे में एक कहावत है वहां के लोगों और वहां की सियासत को समझना बड़े से बड़े रणनीतिकार के लिए आसान नहीं होता. लेकिन नीतीश कुमार बीते 18 सालों से न सिर्फ बिहार की जनता की उम्मीदों को पूरा करने में लगे हैं, बल्कि बिहार के कई सेक्टर की तस्वीर भी बदल रहे हैं.