Bihar Elections 2025 strategy: कहते हैं एक नेता 5-10 साल सीएम रह जाए, तो उसके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी फैक्टर बनने लगता है, लेकिन नीतीश कुमार बीते 18 साल से बिहार के सीएम हैं, बीच में कुछ वक्त के लिए उन्होंने जीतनराम मांझी को भी सीएम बनाया था, कभी लालू के साथ गए तो कभी एनडीए के साथ रहे, साथी बदलते रहे, पर सत्ता में बने रहे, तो सवाल है आखिर नीतीश के पास ऐसी कौन सी सियासी चाबी है, जो किसी के साथ रहकर वो मुख्यमंत्री वाला ताला खोल लेते हैं. इसे समझने के लिए लवकुश समीकरण को समझना होगा
ओवैसी की पार्टी AIMIM के बिहार अध्यक्ष अखतरुल ईमान का, जो लालू यादव को चिट्ठी लिखकर ये कह रहे हैं कि हमारी पार्टी महागठबंधन में शामिल होना चाहती है, ताकि NDA को रोका जा सके. जबकि दूसरी ओर सीएम नीतीश कुमार चुनावी मोड में आ चुके हैं, लंबे वक्त बाद इन्होंने पटना में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. करीब 400 से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को नीतीश कुमार ने बूथ जीतो अभियान चलाने का निर्देश दिया. एक-एक बूथ जीतेंगे तो विधानसभा तो अपने आप जीत जाएंगे.
जो तेजस्वी ये प्रचार कर रहे थे कि बीजेपी-जेडीयू में सब ठीक नहीं चल रहा, उन्हें भी पोस्टर से जवाब मिल रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर वाले पोस्टर में लिखा सोच दमदार, काम असरदार, फिर एक बार एनडीए सरकार. ये पोस्टर ये दिखाने की कोशिश है कि हम साथ-साथ हैं. पर ये बात जनता को कितनी समझ आती है, ये देखने वाली बात होगी. बिहार चुनाव को लेकर जिस तरीके की चर्चाएं हैं, वो साफ इशारा करती हैं कि अक्टूबर महीने में चुनाव का ऐलान हो सकता है, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में छठ महापर्व है, तो उसके बाद नवंबर में ही चुनाव संपन्न हो सकते हैं. उससे पहले 30 सितंबर को फाइनल वोटर लिस्ट छपकर आएगा, जिसे लेकर भी विपक्षी पार्टियां सवाल उठा रही हैं. तेजस्वी यादव का कहना है
“बिहार चुनाव से पहले गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कर नई वोटर लिस्ट तैयार किया जाना लोकतंत्र पर हमला है. ये गरीब और वंचित-शोषित मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है. सूबे के करीब 60 फीसदी लोगों को अब अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी.”
हालांकि चुनाव आयोग की अपनी अलग दलील है. ये बात तेजस्वी भी जानते हैं कि अगर नीतीश उनके साथ होते तो उन्हें सत्ता तक पहुंचने में मुश्किल नहीं आती, तो फिर ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर नीतीश किस समीकरण के सहारे इतने सालों से सत्ता में हैं.
क्या है लवकुश समीकऱण ?
इसके अलावा महिलाओं को लेकर नीतीश सरकार ने जो योजनाएं चलाईं औऱ बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर जो काम किया, उसका भी फायदा उन्हें हर चुनाव में मिलता है. यही वजह है कि नीतीश जिधर होते हैं, उधर वोटबैंक बढ़ जाता है. अब इस बार क्या कहानी होती है, ये चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा.