पटना: मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट गहरा गया है. बिहार विधानसभा ने उन्हें नोटिस भेजकर सात दिनों में जवाब मांगा है. जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है. पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम सिंह को छह साल के लिए जदयू से निष्कासित किया गया था. अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटक गई है.
बिहार विधान परिषद चुनाव में पटना स्नातक सीट पर एनडीए के अधिकृत उम्मीदवार और जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार का विरोध करते हुए अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार के पक्ष में प्रचार किया था. इसी वजह से पार्टी ने कार्रवाई की. जदयू ने 24 अक्टूबर को विधानसभा स्पीकर को दस पन्नों के सबूतों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ पत्र लिखा था.
स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार ने कहा था कि अनंत सिंह का पक्ष जानने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. विधानसभा सचिव संजय कुमार सिंह ने नोटिस जारी किया है, जो अनंत सिंह को प्राप्त हो गया है. इस प्रकरण के बाद अनंत सिंह को काफी झटका लगा है. उनकी पत्नी को बीस सूत्री समिति से बाहर कर दिया गया और सरकारी बंगला खाली करने को कहा गया है. इतना ही नहीं, दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.
अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है. 25 नवंबर को उनकी बेटी की शादी है, जिस वजह से कोर्ट ने एक माह की मोहलत दी. उनकी जमानत के खिलाफ मृतक के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मचे घमासान का हल निकालने की जिम्मेदारी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी थी, लेकिन वे दोनों के बीच का झगड़ा नहीं सुलझा पाए. नीरज कुमार की जीत के बाद भी तनाव बना रहा. अब विधानसभा से नोटिस मिलने के बाद अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ गई हैं.