UP BJP की करारी हार की वजह नतीजे के 21 दिन बाद आए सामने, 150 MLA, 40 MLC, एक बड़े नेता ने बनाया प्लान!

Global Bharat 25 Jun 2024 3 Mins 82 Views
UP BJP की करारी हार की वजह नतीजे के 21 दिन बाद आए सामने, 150 MLA, 40 MLC, एक बड़े नेता ने बनाया प्लान!

भारतीय जनता पार्टी में UP की हार कोई पचा नहीं पाया है. ख़ास तौर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की आंखों की नींद उड़ी हुई है. BJP ने सभी लोकसभा सीटों पर समीक्षा बैठक की है. उस बैठक की रिपोर्ट दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा रही है. रिपोर्ट में पता चल रहा है कि योगी को हटाने के पीछे केजरीवाल नहीं बल्कि उनके कैबिनट से लेकर BJP के UP वाले नेता भी शामिल हैं.

दिल्ली से लेकर बीजेपी के साथ गठंधन की एक पार्टी का नेता भी योगी को नहीं चाहता है. BJP की अपनी रिपोर्ट तैयार होती उसके पहले योगी आदित्यनाथ ने खुद अपनी रिपोर्ट तैयार की है. सभी दगाबाज़ों का नाम अब खुल गया है. एक से बढ़कर एक जयचंद बीजेपी में मौजूद हैं, लेकिन सवाल उठता है कि योगी से उनको क्या दिक्कत है? क्यों योगी को हटाने के लिए मोदी की हार तक को लिखने को तैयार थे बीजेपी के जयचंद. योगी पर चारों तरफ से हमला बोला गया.

इसके साथ ही रिपोर्ट में और भी चौंका देने वाले दावे किए गए हैं. अगर ये सच हैं तो फिर बड़ी मुश्किल होगी. समीक्षा टीम को कई ऑडियो भी मिले हैं, जिसमें एक नेता, दूसरे नेता को साफ-साफ कह रहा है कि प्रचार करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि शांत रहो. कम सीटें आएंगी तभी योगी जाएंगे. तो क्या इस बात से बीजेपी में मोदी-शाह की जोड़ी अनजान थी? और लखनऊ से लकेर दिल्ली तक ये नेता कौन हैं, जो योगी को हराने की बात कर रहे हैं. BJP कार्यकर्ताओं के भारी रोष है. यहां तक कि कभी लखनऊ बीजेपी कार्यकर्ता और प्रवक्ता की गाड़ी रोककर दारोगा हेकड़ी निकालता है, तो कभी भदोही के एक आम कार्यकर्ता पर गुंडा एक्ट लग जाता है.

सूत्र दावा करते हैं बीजेपी की इस हार में 150 से ज्यादा विधायकों का हाथ है. वो विधायक जिनपर जिम्मेदारी थी कि पार्टी को वोट दिलाएं वो वोट लेने की बजाय पार्टी का ही वोट कम करने में लग गए. विधायक योगी से इस बात पर नाराज़ हैं कि उनकी सरकार में अधिकारी विधायकों का एक काम नहीं करते हैं. यहां तक कि कुछ जिलों के विधायकों का फोन तक नहीं उठता है.

कई विधायक तो पहले बाहुबली या माफिया थे लेकिन वो चाहते हैं कि योगी ना होते तो ठीक रहता. पार्टी में रहते हुए खनन से लेकर नंबर दो का काम करने वाले नेताओं को योगी के होने से भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ना खाऊंगा ना खाने दूंगा से सबसे ज्यादा कुछ विधायक और उनके करीबी ही नाराज़ हैं.

वहीं यूपी में हार की बात करें तो बीजेपी से एक गलती ये हो गई कि पार्टी लेवल पर कोई बड़ी बैठक नहीं हुई. यहां तक की बीजेपी नेताओं, कार्यकर्ताओं, पार्टी विधायकों, सांसदों के साथ कोई बैठक ना होना, योगी को संगठन की ताकत से दूर रखना, पार्टी नेताओं में ये मैसेज देना कि योगी के पास ताकत नहीं है वो सब योगी के ख़िलाफ़ काम कर गया.

अधिकारी खुल कर कभी किसी भी सरकार का विरोध नहीं करते हैं. इक्का-दुक्का सीट को छोड़ दें तो बीजेपी की बंपर हार में बीजेपी के नेता ही जयचंद हैं. दावा किया जा रहा है कि एक नेता जी ने प्लानिंग की थी कि योगी के रहते अगर कम नंबर आते हैं तो वो दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मीटिंग करेंगे.

मीटिंग में वो विधायकों की संख्या बताएंगे, लेकिन RSS की एंट्री के बाद बीजेपी में उनकी चली नहीं. वो बैरंग लौट गए. ना विधायकों का सपना पूरा हुआ, ना योगी को हटाया गया, ना ही हटाया जा रहा है. लेकिन मोदी का भारी नुकसान हो गया.

अगर आज मोदी एक कमज़ोर सरकार के पीएम हैं तो इसके जिम्मेदार भी वही हैं. योगी को फ्रंट पर ना करना, विरोध करने वाले नेताओं की बात सुनना ही भारी पड़ गया. खैर दावा ये भी है कि अब ऐसे विधायकों की लिस्ट योगी के पास पहुंच गई है और उम्मीद है कि इस बार इनका टिकट पक्का कटेगा. क्योंकि अगले चुनाव में सरकार भी योगी होगी और पार्टी के सुपरपावर भी योगी होंगे.

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