BJP President Crisis: दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी की सबसे बड़ी चिंता पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी बन गई? अनुशासन की राह पर चलने वाली BJP आख़िर कहां फंस गई? क्या ‘गुजरात’ और नागपुर में पेंच फंसा? या फिर यूपी दिल्ली की राह में रोड़ा बना? यूपी बीजेपी का अध्यक्ष 2027 चुनाव की तैयारियों का चेहरा होगा? या बात कोई और है? क्योंकि BJP में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब उसे UP का अध्यक्ष खोजने के लिए प्रयोगशाला खोलनी पड़ी...? हाईकमान को नागपुर ने एक संदेश भेजा, क्या उसी में अटकी बीजेपी.UP अध्यक्ष की फंसी कुर्सी?
सबसे बड़ा सवाल है कि आख़िर ऐसी क्या मज़बूरी है कि UP में बीजेपी को अध्यक्ष नहीं मिल रहा है? दरअसल अमित शाह ने मंच से केशव को मित्र कहा? लेकिन मित्र शब्द की ताकत भी क्या अध्यक्ष पद की कुर्सी नहीं दिला पाई? क्या UP में RSS किसी और को चाहता है? मोदी-शाह को किसी अपने की तलाश है? क्योंकि अंदरखाने चर्चा है कि UP का अध्यक्ष ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का रास्ता खोलता है, जबकि RSS का इशारा साफ है, अध्यक्ष ऐसा चाहिए जो सत्ता, संगठन और नागपुर के बीच तालमेल बना पाए, केशव ने पिछले साल कहा संगठन बड़ा होता है, RSS को ये बात हज़म ना हो पाई! तो फिर तलाश कहां तक पहुंच पाई?
यूपी बीजेपी अध्यक्ष का रास्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष तक इसलिए भी जाता है क्योंकि दिल्ली की कुर्सी महफूज़ तब होगी, जब यूपी की सत्ता बीजेपी के हाथ में होगी. सूत्र कहते हैं बीजेपी और RSS के बीच एक राय नहीं बन पा रही है? तो फिर वजह क्या है?
बीजेपी अनुशासन से चलने वाली पार्टी मानी जाती है, लेकिन विपक्ष तंज़ कसता है कि अध्यक्ष क्यों नहीं चुन पा रही है? संसद में अखिलेश यादव ने अमित शाह से पूछा था, बताइए दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी अपना अध्यक्ष क्यों नहीं चुन पा रही है?
हालांकि शाह और संघ सब समझते हैं कि योगी आदित्यनाथ पोस्टर बॉय हैं, उनका चुनाव सिर पर है. यूपी की सियासत संविधान और समाज बांटने की राह पर है! तो यूपी का अध्यक्ष नागपुर का चहेता होगा या मोदी-शाह का कोई ख़ास, देखिए बृजेश मिश्रा के साथ The Debate. UP कैसे बना बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए रोड़ा?