बिहार में दो जिला है एक का नाम है सीतामढ़ी, दूसरे का नाम है सारण. उधर सीतामढ़ी में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह रैली करने पहुंचते हैं, इधर सारण में 24 घंटे पहले ही एक बड़ी साजिश का खुलासा होता है. एक लड़का जो मदरसे में पढ़ रहा होता है, जिसका नाम था नूर, वो खेलते-खेलते मदरसे की बाउंड्री तक जाता है. वहां उसे गेंद जैसा एक सामान नजर आता है, जिसे उठाकर मौलाना के पास लाता है.
मौलाना उसे देखकर कहते हैं इसे फेंकों, ये खिलौना नहीं, बल्कि खतरनाक सामान है. जैसे ही वो बच्चा उसे फेंकता है, ये फट जाता है और मदरसे में पढ़ने वाले लड़के इधर-उधर भागने लगते हैं. तुरंत ख़बर गड़खा थाने तक पहुंचती है. बिहार पुलिस के जवान स्पेशल कमांडो को लेकर मदरसे में पहुंचते हैं और जांच में जो पोल खुलती है, वो दंग कर देने वाला होता है.
हो सकता है कुछ लोग ये कहें कि ये मदरसे को बदनाम करने की प्लानिंग थी तो सवाल है कि अगर ये सबकुछ गलती से हुआ तो फिर इस मामले की लीपापोती की कोशिश कुछ मौलानाओं ने क्यों की. डीएसपी राजकिशोर सिंह का कहना है कि घटना के बाद से मदरसा के सभी लोग लापता हैं. आस पास के लोगों से पूछताछ की जा रही है. सबूत मिटाने के लिए टाइल्स को पानी से साफ किया गया है.
बता दें कि बिहार के जिस छपरा शहर में इतने बड़े खेल का खुलासा हुआ है, उससे 100 किलोमीटर सीतामढ़ी में अमित शाह की रैली थी. अमित शाह को धमकी मिलने वाले कई मामले लगातार सामने आते हैं, तो क्या देश की गृहमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने की तैयारी थी. ये सवाल इसलिए बड़ा हो जाता है क्योंकि कुछ दिनों पहले बिहार के फुलवारीशरीफ से कुछ ऐसे एजेंट पकड़े गए थे, जिनकी प्लानिंग 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की थी.
तो यहां सवाल उठता है कि क्या अलग-अलग मदरसों में इसकी प्लानिंग चल रही है, अगऱ ऐसा है तो फिर उन मौलानाओं को आगे आकर इसे रोकना होगा. खुद इसकी जानकारी देनी होगी और मदरसे को बदनाम होने से रोकना होगा.संस्थान चाहे कोई भी हो, जहां शिक्षा मिलती है. जहां गुरु और शिष्य का रिश्ता सिर्फ पढ़ने-पढ़ाने का होता है, किसी स्पेशल ट्रेनिंग का नहीं, वहां से इस तरह की हरकतें जब सामने आती हैं, जब इस तरह की जानकारियां पता चलती है तो फिर असम की वो तस्वीर याद आती है, जहां एक लाइन से मदरसों पर बुलडोजर चलता है.
सीएम योगी का वो बयान याद आता है कि देश संविधान के अनुसार चलेगा, शरियत के अनुसार नहीं. क्या ऐसे मदरसों पर ताला लगाने में मौलानाओं को खुद आगे आकर पुलिस की मदद नहीं करनी चाहिए