लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. पार्टी का खास फोकस पूर्वांचल पर है, जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने लालगंज, गाजीपुर, घोसी और जौनपुर जैसी चार सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, 2024 में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका. ऐसे में बसपा अब पुराने प्रभाव वाले इलाकों में दोबारा पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है.
इसी रणनीति के तहत बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद सितंबर में पूर्वांचल के कई जिलों में जनसभाएं करेंगे, इससे पहले 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में उनकी बड़ी सभा प्रस्तावित है, जिसे मायावती की मंजूरी मिल चुकी है. मंडलीय रैलियों से पहले आकाश आनंद संगठन और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में सक्रिय होंगे.
आकाश आनंद की रणनीति में युवा और Gen-Z वोटर्स खास केंद्र में हैं. हाथरस की हालिया रैली में उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अंकल कहकर पुरानी राजनीति पर निशाना साधा था. बसपा अब इसी आक्रामक अंदाज के जरिए युवाओं को जोड़ने के साथ अपने पारंपरिक वोट बैंक को भी बनाए रखने की कोशिश कर रही है.
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि हर दल को जनता के बीच जाने और अपनी रणनीति बनाने की आजादी है. उन्होंने कहा कि सपा को किसी से ईर्ष्या नहीं है और मुकाबला जनता के लिए बेहतर काम करने का है.
वहीं, कांग्रेस ने मायावती पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद उनका भाजपा विरोध कमजोर हुआ है. कांग्रेस प्रवक्ता उमा शंकर पांडेय ने इसे ईडी-सीबीआई के दबाव या वैचारिक बदलाव से जोड़कर सवाल उठाया.
वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के मुताबिक बसपा जातीय समीकरणों के साथ युवाओं पर भी दांव लगा रही है. उनका मानना है कि दलित युवाओं के दूसरे संगठनों की ओर जाने के बीच आकाश आनंद उन्हें दोबारा बसपा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. 2019 में बसपा ने यूपी में 10 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि 2024 में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी.
अब 2027 से पहले बसपा के सामने संगठन, कोर वोट बैंक और युवा मतदाताओं को वापस जोड़ने की बड़ी चुनौती है. आकाश आनंद की सभाओं को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.