नई दिल्ली: वंदे मातरम् को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस ने अपना रुख साफ कर दिया है. पार्टी ने कहा है कि उसके सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे. कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि यह फैसला 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) बैठक में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर आधारित है.
बुधवार को हुई सीडब्ल्यूसी बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. कई नेताओं ने 1937 के रुख को दोहराया. पार्टी का कहना है कि अक्टूबर 1937 में राष्ट्रीय परिषद ने प्रस्ताव पारित कर तय किया था कि राष्ट्रीय और सार्वजनिक सभाओं में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद ही गाए जाने चाहिए.
यह फैसला भाजपा द्वारा मल्लिकार्जुन खरगे पर वंदे मातरम् का ‘अधूरा’ संस्करण गाने का आरोप लगाने के बाद आया है. खरगे ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने वही संस्करण गाया जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी ने गाया था.
कांग्रेस के अनुसार, 1937 का निर्णय लंबी बहस के बाद आया था. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत के शुरुआती दो छंद मातृभूमि की प्रशंसा करते हैं, जबकि बाद के छंदों में धार्मिक और पौराणिक प्रतीक हैं. रवींद्रनाथ टैगोर ने भी जवाहरलाल नेहरू को लिखे पत्र में सलाह दी थी कि पहले दो छंद समावेशी राष्ट्रीय गीत के रूप में उपयुक्त हैं.
नेहरू ने बाद में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि पूरी कविता के उत्तरार्ध में विशिष्ट धार्मिक संदर्भ हैं, जिन्हें सभी समुदायों वाली राष्ट्रीय सभाओं में समान रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता. कांग्रेस अब भी उसी ऐतिहासिक निर्णय पर अटल है.