नई दिल्ली: दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर 30 अप्रैल की सुबह से ही गहमा गहमी का माहौल था. लगातार मंत्री और अधिकारियों का आना जाना लगा हुआ था. क्योंकि 4 अहम मीटिंग होनी थीं, इन बैठकों में ही पाकिसतान का भविष्य तय किया जाना था. जहां सबसे पहली बैठक कैबिनेट सुरक्षा कमेटी (CCS) की हुई जहां पाकिस्तान पर क्या एक्शन लिया जाना चाहिए, इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) की बैठक हुई इस बैठक में देश के वैश्विक संबंधों पर गहन मंथन किया गया, साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई होगी कि अगर भारत-पाकिस्तान युद्ध होता है को दुनिया मे हमारे संबंधों पर क्या असर पड़ेगा और कौन देश किसे समर्थन देगा?. इसके बाद फिर एक अहम बैठक CCE की भी हुई, जहां देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चर्चा की गई. ये समझा गया कि अगर हम युद्ध में उतरते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? वैश्विक व्यापार में क्या मुश्किले आएंगी, अगर मुश्किलें आती हैं तो उनसे किस तरह निपटा जाएगा?. इन तीनों बैठकों के बाद एक कैबिनेट बैठक भी पीएम आवास पर रखी गई थी, जिसमें तीनों बैठकों में हुई चर्चा के बारे में बात की गई. साथ ही इस बैठक में सभी को बताया गया होगा कि अब भारत अपने दुश्मन पाकिस्तान को किस तरह से सबक सिखाने वाला है.
गृह मत्री और रक्षा मंत्री से भी मिले पीएम
इस सब में एक खास बात ये भी रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने सारी बैठकों से अलग अपने सबसे खास कहे जाने वाले अमित शाह और राजनाथ सिंह के साथ भी मुलाकात की है. ये मुलाकात इस बात का अंदेशा और भी बढ़ा देती है कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत कोई कड़ा एक्शन लेने वाला है. क्योंकि जिस तरह से सेना लगातार एक्टिव हो रही है, और पाकिस्तान बैकफुट पर आ रहा है. इससे साफ समझा जा सकता है कि पाकिस्तान कितने दवाब में है और भारत कभी भी हमला कर सकता है. हालांकि हमला अभी होगा या नहीं ये तो 3 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही पता चल सकेगा.