रक्षा डेस्क: भारतीय सैन्य इतिहास में रणनीतिक सुधारों के एक नए और बेहद शक्तिशाली युग की शुरुआत हो चुकी है। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) दिवंगत जनरल बिपिन रावत का एक बेहद महत्वाकांक्षी और ड्रीम प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से हकीकत में बदल गया है। भारतीय सेना ने चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बेहद संवेदनशील इलाकों में अपनी सबसे घातक और आधुनिक लड़ाकू इकाई इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG - Integrated Battle Groups) की पहली आधिकारिक तैनाती को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है। सेना के इस आक्रामक कदम के बाद सीमा पार चीनी खेमे (पीएलए) और दुश्मनों में खौफ का माहौल साफ देखा जा रहा है।
क्या है जनरल बिपिन रावत का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' IBG? जनरल बिपिन रावत ने थलसेना प्रमुख और फिर सीडीएस रहते हुए भारतीय सेना के पारंपरिक युद्ध तंत्र को बदलकर उसे तेज, मारक और बेहद आधुनिक बनाने की वकालत की थी। इसी सोच के तहत 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (IBG) की अवधारणा तैयार की गई थी। पारंपरिक तौर पर किसी युद्ध के समय कोर (Corps) और ब्रिगेड को मोर्चे पर जुटने में काफी समय लगता है, लेकिन IBG सेना की ऐसी 'कस्टमाइज्ड' और आत्मनिर्भर लड़ाकू इकाइयां हैं, जो आकार में ब्रिगेड से थोड़ी बड़ी और डिवीजन से छोटी होती हैं। इनका गठन सीधे तौर पर दुश्मन के इलाके में त्वरित आक्रमण (Quick Strike) करने के लिए किया गया है।
सभी हथियारों से लैस, सिर्फ 12 घंटे में हमले के लिए तैयार IBG की सबसे बड़ी ताकत इसकी कार्यप्रणाली है। इस एक सिंगल यूनिट के भीतर ही थलसेना के इन्फैंट्री (पैदल सेना), आर्मर्ड (टैंक रेजीमेंट), आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस, सिग्नल्स और लॉजिस्टिक्स के कमांडो व जवानों को एक साथ एकीकृत किया जाता है। इसका मतलब यह है कि युद्ध जैसी स्थिति में इस यूनिट को किसी दूसरे बैकअप का इंतजार नहीं करना पड़ता। यह बेहद हल्की, मोबाइल और अत्यधिक आक्रामक यूनिट है, जो आदेश मिलने के महज 12 से 24 घंटों के भीतर दुश्मन की सीमा में घुसकर तबाही मचाने की क्षमता रखती है।
चीन सीमा पर तैनाती के क्या हैं रणनीतिक मायने? सैन्य सूत्रों के मुताबिक, एलएसी (LAC) के पहाड़ी और कठिन इलाकों में कोर मुख्यालयों के आदेश और मोबिलाइजेशन में समय लगता था, लेकिन चीन सीमा पर आईबीजी की इस पहली तैनाती ने भारत की रक्षात्मक रणनीति को अब पूरी तरह आक्रामक बना दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी लद्दाख और उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर आईबीजी की मौजूदगी से चीन की किसी भी हिमाकत या घुसपैठ का जवाब पलक झपकते ही दिया जा सकेगा। जनरल बिपिन रावत ने जिस 'थिएटर कमान' और आधुनिकीकरण का सपना देखा था, आईबीजी की यह सफल तैनाती उसी दिशा में भारतीय सेना की एक ऐतिहासिक और निर्णायक जीत है।