देशभर में पेपर लीक को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए Anti Paper Leak Law लागू किया है. इस कानून का मकसद पेपर लीक पर लगाम लगाना है. बता दें कि इन दिनों नीट पेपर लीक और यूजीसी नेट परीक्षा कैंसिल हो जाने पर देशभर में बवाल मचा हुआ है और विपक्ष के हमले से केंद्र सरकार बैकफुट पर है. इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसी साल फरवरी में पारित हुए कानून को शनिवार 22 जून से प्रभावी कर दिया है.
वहीं इस कानून के प्रावधानों की बात करें तो पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर 1 कोरड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा और 10 साल तक की सजा होगी. इस कानून को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले ही जानकारी दी थी. लोक परीक्षा कानून 2024 में 15 गतिविधियों को चिन्हित किया गया है.
केन्द्र सरकार का एंटी पेपर लीक कानून
यूपी सरकार का एंटी पेपर लीक कानून
हालांकि बड़ी बात ये है कि केन्द्र सरकार वाले एंटी पेपर लीक कानून में स्टूडेंट को नहीं रखा गया है, केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने जब बिल पेश किया था, तब साफ-साफ कहा था कि हमारा मकसद उन लोगों को रोकना है जो देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, हमने उम्मीदवारों को इससे बाहर रखा है. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मोदी सरकार ने जिस नियम का नोटिफिकेशन 21-22 जून की आधी रात को बनाया था. इससे जुड़ा बिल संसद में पहले ही पास हो गया था, राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी भी फरवरी में ही दे दिया था, लेकिन सरकार इसे लागू करने के लिए सही वक्त का इंतजार कर रही थी और बीते 9 दिनों में जैसे ही तीन बड़ी परीक्षाएं स्थगित हुई, छात्रों का आक्रोश बढ़ा, सरकार ने इसे लागू कर दिया.
यूपी में करीब 56 फीसदी आबादी युवाओं की है और इस बार चुनाव से ठीक पहले युवाओं की नाराजगी से भी बीजेपी को नुकसान हुआ है, इसलिए कई लोग ये कह रहे हैं कि बीजेपी इस कार्यकाल में युवाओं के लिए कई बड़े फैसले लेने वाली है और पहले फैसले की बानगी सरकार गठन के 20 दिन बाद ही दिख चुका है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या 1 करोड़ के जुर्माने का नियम बना देने से ये वाला कानून रुक जाएगा, या सरकार को यूपीएससी वाला नियम अपनाना होगा, जिसका इतने बरसों में कभी पेपर लीक नहीं हुआ.