कोलकाता: तारीख थी- 8 अप्रैल 2026, वक्त था दोपहर का, मुख्य चुनाव आयुक्त ने बंगाल चुनाव की ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों, बंगाल के डीजीपी, मुख्य सचिव और कई बड़े अधिकारियों की मीटिंग बुलाई थी. जिसमें कूच बिहार के पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए IAS अधिकारी अनुराग यादव के बोलने की जैसे ही बारी आती है, उनसे CEC ज्ञानेश कुमार पूछते हैं, आपके यहां कितने मतदान केन्द्र हैं, जिसे सुनते ही पहले वो अगल-बगल देखने लगे और कुछ देर बाद बोले, 125, जिसे सुनते ही CEC भड़क उठे, और बोले आप घर चले जाइए, जिसके जवाब में IAS अनुराग यादव ने कहा कि आप हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते. हमने इस सेवा में अपने 25 साल दिए हैं. आप इस तरह से बात नहीं कर सकते.
इनका जवाब सुन मीटिंग में थोड़ी देर के लिए सन्नाटा पसर जाता है, बड़ी मुश्किल से मीटिंग में बाकी मुद्दों पर चर्चा होती है और फिर इन्हें पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया जाता है, और सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आती है कि अनुराग यादव को बहस की वजह से नहीं बल्कि कार्यक्षमता में कमजोर होने की वजह से हटाया गया है, क्योंकि 20 दिन वहां बिताने के बाद भी उन्हें अगर ये नहीं पता तो ये बड़ी सोचने वाली है. लेकिन इस बात पर सियासत भी शुरू हो जाती है.
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि ज्ञानेश कुमार BJP के छोटे कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रहे हैं, जिनकी भाषा स्तरहीन है. जबकि कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत कहते हैं समय आने पर ज्ञानेश गुप्ता का भी हिसाब होगा, अनुराग यादव या डेरक ओ ब्राइन इनके बाप के नौकर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पहले इन्होंने टीएमसी के सांसद डेरेक ब्रायन 'गेट लॉस्ट' कहा और फिर जिस तरह से आईएएस अनुराग यादव के खिलाफ बदतमीजी की है, उससे उनका हिटलरशाही वाला व्यवहार साफ़ दिखाई देता है.
इससे पहले चुनाव आयोग के X हैंडल से टीएमसी को मैसेज देने वाला एक पोस्ट भी वायरल हुआ था जिस पर खूब सवाल उठे थे, कईयों ने कहा था ये भाषा चुनाव आयोग की नहीं हो सकती. पहले से भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त दोनों पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब इनसे भी ज्यादा चर्चा IAS अनुराग यादव की हो रही है...
कौन हैं IAS अनुराग यादव
लेकिन कहा जाता है आईटी विभाग के प्रमुख सचिव रहते एक बड़ा विवाद हुआ था. तब एआई पूच नाम की कंपनी से आईटी विभाग करार किया था, जिसके तहत वो यूपी में 25000 करोड़ का निवेश करने वाली थी, लेकिन बाद में पता चला उस कंपनी की कुल संपत्ति ही 50 करोड़ से ज्यादा नहीं है, जिसके बाद इस करार पर खूब सवाल उठे, और आनन-फानन में इन साहब का तबादला कर दिया गया, और उसके बाद जब बंगाल चुनाव आया तो ये ऑब्जर्वर बनाकर भेजे गए, लेकिन वहां भी मुख्य चुनाव आयुक्त से इनकी बहस हो गई और अब वापस यूपी लौटने वाले हैं...
तो सवाल उठता है कि आखिर IAS ऑफिसर अनुराग यादव का नाम विवादों से बार-बार क्यों जुड़ रहा है. UPSC की परीक्षा देकर IAS बनने वाले साहब ही जब बेसिक सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे तो क्या होगा, चुनाव में पोलिंग बूथों की संख्या तो उन नेताओं और पार्टी एजेंट को भी पता होती है जो अपने उम्मीदवार के लिए दिन-रात लगे होते हैं...
और चुनाव आयोग का काम तो हर बूथ पर निष्पक्ष चुनाव हो, इसका प्लान बनाने का है, फिर ये जवाब तुरंत क्यों नहीं दे पाए, इस पर भी कई लोग सवाल उठा रहे हैं....फिलहाल यही साहब बता पाएंगे कि मीटिंग में सिर्फ इसी सवाल को लेकर बात इतनी बढ़ी या बात कुछ और भी थी, जो मीडिया में पूरी तरह सामने नहीं आ पाई...