नई दिल्ली: पटना की सड़कों पर ट्रैफिक की मार से तंग आ चुकी जनता को लंबे इंतजार के बाद एक बड़ी राहत मिल गई है. सोमवार को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाटलिपुत्र बस डिपो (आईएसबीटी) से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन किया. उनके साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा भी थे.
उद्घाटन के ठीक बाद नीतीश जी खुद मेट्रो ट्रेन में सवार होकर भूतनाथ स्टेशन तक का सफर तय किया, जो शहरवासियों के लिए एक प्रेरणादायक क्षण साबित हुआ. हालांकि, आम यात्रियों के लिए यह सेवा 7 अक्टूबर से ही उपलब्ध होगी. इसके साथ ही पटना भारत के 24वें मेट्रो शहर के रूप में जुड़ गया, जो बढ़ती भीड़भाड़ और यातायात जाम की समस्या से निपटने का एक ठोस प्रयास है.
शुरुआती दौर में ब्लू लाइन (कॉरिडोर-2) का प्राथमिक खंड चालू किया गया है, जो आईएसबीटी से जीरो माइल होते हुए भूतनाथ तक 4.5 किलोमीटर का छोटा लेकिन प्रभावी रूट कवर करता है. किराया भी किफायती रखा गया है. एक स्टेशन का सफर मात्र 15 रुपए में, जबकि पूरे रूट पर अधिकतम 30 रुपए.
ट्रेनें सुबह 8 से रात 10 बजे तक दौड़ेंगी, हर 20 मिनट के अंतराल पर, और रोजाना 40-42 चक्कर लगाएंगी. हर ट्रेन में तीन कोच हैं, जो 138 यात्रियों को बैठने और करीब 945 को खड़े रहने की क्षमता रखते हैं. मेट्रो के कोचों को बिहार की सांस्कृतिक विरासत से सजाया गया है. मधुबनी पेंटिंग्स से चित्रित दीवारें राज्य की कला को जीवंत करती हैं. सुरक्षा के लिहाज से हर कोच में 360 डिग्री कैमरे, इमरजेंसी बटन और ड्राइवर से सीधी बात के लिए माइक लगाए गए हैं.
महिलाओं और दिव्यांगों के लिए 12-12 सीटें आरक्षित हैं, जो समावेशी यात्रा को सुनिश्चित करती हैं. यह प्रोजेक्ट नीतीश कुमार का सपना रहा है, जिसकी नींव 2013 में रखी गई. उसी साल कैबिनेट ने डीपीआर तैयार करने को मंजूरी दी, और 2014 में केंद्र से हरी झंडी मिली. कुल पांच चरणों में प्रस्तावित इस योजना की आधारशिला फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी.
उसी महीने पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PMRCL) का गठन हुआ, जिसे दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने तकनीकी सलाह दी. मार्च 2019 में इंदिरा भवन में इसका दफ्तर खुला. जनवरी 2022 में L&T को फेज-1 के कॉरिडोर-2 का निर्माण सौंपा गया, जिसमें पांच स्टेशनों का लक्ष्य था. कुल अनुमानित खर्च 13,925.5 करोड़ रुपए है, जिसमें बिहार सरकार, केंद्र और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) का योगदान शामिल है.