नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के एक बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखा बवाल मच गया है. शनिवार को नई दिल्ली में दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में अंसारी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने विचार का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है.
यह कार्यक्रम ‘इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर’ में आयोजित हुआ था. अंसारी ने नूरानी की 2019 में प्रकाशित किताब ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का भी उल्लेख किया और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के उभार पर चिंता जताई.
सीएम योगी की तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (20 सितंबर) को ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में ‘प्रेरणा विमर्श’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंसारी के बयान पर जोरदार हमला बोला. सीएम योगी ने कहा, “भारत की परंपराओं और संस्कृति को लेकर उनके बयान वास्तव में चिंताजनक हैं. भारत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया. उन्होंने सनातन परंपरा को अपमानित करने वाले और हिंदू परंपरा का अनादर करने वाले बयान दिए तथा इसे आतंकवाद से जोड़ने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास किया.”
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है क्योंकि यह सनातन धर्म की भूमि है. यहां के अधिकांश लोग अपनी परंपराओं, ऋषि-मुनियों की विरासत, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करते हैं. भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
राहुल गांधी पर भी निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने उनके कथित ‘झूठ की गूंज’ कार्यक्रम को महिलाओं का अपमान बताया. योगी ने कहा कि भारतीय परंपराएं महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों का सम्मान सिखाती हैं. अगर किसी संकरे रास्ते पर बुजुर्ग, महिला या दिव्यांग आ जाएं तो हम रास्ता छोड़ देते हैं. लेकिन कुछ लोग सही रास्ते से भटक गए हैं और समाज में भ्रम व अराजकता फैलाना ही उनका मकसद रह गया है.
सीएम योगी ने अपनी सरकार की महिलाओं के लिए की गई पहलों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि तीन पीएसी बटालियनों के नाम झलकारी बाई, रानी अवंतीबाई लोधी और ऊदा देवी के नाम पर रखे गए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चार जाति’ वाले बयान का भी हवाला दिया. गरीब, किसान, महिला और युवा—और कहा कि केंद्र व राज्य सरकार इनके कल्याण के लिए काम कर रही है.
VHP का जोरदार हमला
विश्व हिंदू परिषद ने भी अंसारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि अंसारी के विचार उनकी ‘हिंदू-विरोधी, नेहरूवादी और कट्टरपंथी मानसिकता’ को दर्शाते हैं. बंसल ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “उपराष्ट्रपति रहते हुए PFI से जुड़े कार्यक्रमों में आपकी मौजूदगी और राजदूत के रूप में राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं. आज आप हिंदुओं के सामने सांप्रदायिकता की बात कर रहे हैं? अगर हिंदू वास्तव में सांप्रदायिक होते तो आपमें ऐसा बयान देने का साहस नहीं होता.”
उन्होंने अयोध्या राम जन्मभूमि फैसले की अंसारी द्वारा की गई आलोचना का भी जिक्र किया और कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा मस्जिदें भारत में हैं. बंसल ने अंसारी से अपील की कि वे नेहरूवादी, जिन्नावादी और हिंदू-विरोधी मानसिकता से बाहर निकलें और देश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें.
अंसारी ने क्या कहा था?
पूर्व उपराष्ट्रपति ने नेहरू के उस बयान का हवाला दिया जो विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक के दौरान दिया गया था. तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया ने इसे दर्ज किया था और ए.जी. नूरानी ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया है. अंसारी ने कहा कि नेहरू के अनुसार भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद नहीं बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है. यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. दोनों पक्षों के बयान आने के बाद इस मुद्दे पर आगे की प्रतिक्रियाएं देखने लायक होंगी.