मॉस्को: रूस में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया’ ने एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. शुरुआती नतीजों के अनुसार पार्टी को करीब 58 प्रतिशत वोट मिले हैं और वह दो-तिहाई संवैधानिक बहुमत हासिल करने की राह पर है.
रूसी केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के हवाले से सरकारी न्यूज एजेंसियों ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक यूनाइटेड रशिया को लगभग 58 प्रतिशत वोट मिले. कम्युनिस्ट पार्टी 13.84 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि राष्ट्रवादी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपीआर) को 8.9 प्रतिशत वोट मिले. कारोबार समर्थक ‘न्यू पीपल’ पार्टी को करीब 7.94 प्रतिशत वोट मिले हैं, जिससे उसके भी संसद में पहुंचने की संभावना है.
‘स्टेट ड्यूमा’ में कुल 450 सीटें हैं. इनमें आधी पार्टी लिस्ट और आधी एकल निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं. यूनाइटेड रशिया 2003 से संसद के निचले सदन में बहुमत बनाए हुए है. मतदान प्रतिशत करीब 57 प्रतिशत रहा, जो 2021 के पिछले चुनाव से अधिक है. यह चुनाव युद्धकालीन परिस्थितियों में हुआ. मतदान के दौरान साइबर हमले और यूक्रेन की तरफ से कई ड्रोन हमले भी हुए. मतदान के आखिरी दिन यूक्रेन ने युद्ध शुरू होने के बाद के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक किया.
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार 19 क्षेत्रों और क्रीमिया में 1,110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए. क्रेमलिन का उद्देश्य इस चुनाव के जरिए यूक्रेन युद्ध के लिए पुतिन को मजबूत जनसमर्थन दिखाना भी माना जा रहा है. युद्ध अब पांचवें साल में है. चुनाव में शामिल प्रमुख पार्टियों ने युद्ध और पुतिन की नीतियों का समर्थन किया.
उदारवादी याब्लोको पार्टी को ‘शांति और स्वतंत्रता’ के मुद्दे पर प्रचार करने के कारण स्टेट ड्यूमा की पार्टी सूची से बाहर कर दिया गया. वास्तविक विपक्ष की मौजूदगी बेहद सीमित रही और विपक्ष का लगभग सूपड़ा साफ हो गया है. पुतिन की पार्टी की इस जीत से रूस की राजनीति में उनकी पकड़ और मजबूत होने के संकेत हैं.