विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान सीएम योगी ने की ये बड़ी घोषणाएं... विकसित उत्तर प्रदेश है लक्ष्य

Global Bharat 20 Feb 2026 08:23: PM 10 Mins
विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान सीएम योगी ने की ये बड़ी घोषणाएं... विकसित उत्तर प्रदेश है लक्ष्य

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान प्रदेश के शहरीकरण, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और युवा सशक्तीकरण को लेकर सरकार की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की. उन्होंने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश को अगले पांच वर्षों में सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिए 100 नई टाउनशिप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. हाल ही में 114 टाउनशिप प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है, जिससे प्रदेश में आधुनिक और सुव्यवस्थित नगरीय ढांचे का विस्तार होगा.

मुख्यमंत्री ने बताया कि गरीबों सहित सभी वर्गों के लिए आवास निर्माण और लैंड बैंक निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया गया है. शहरी विकास में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए कंप्लायंस रिडक्शन एवं डी-रेगुलेशन नीति लागू की गई है. इसके तहत 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों पर केवल पंजीकरण की आवश्यकता होगी, नक्शा पास कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है. वहीं 500 वर्ग मीटर तक आवासीय और 200 वर्ग मीटर तक व्यावसायिक भूखंडों के लिए स्वतः मानचित्र अनुमोदन की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है. इससे आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी.

परिवहन अवसंरचना के विस्तार पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया. उन्होंने बताया कि लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंत कुंज फेज के लिए 1268 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके अतिरिक्त मेरठ-दिल्ली के बीच नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) के उद्घाटन की घोषणा की गई है, जिससे दोनों शहरों के बीच 40 से 45 मिनट में यात्रा संभव होगी. मेरठ में दो कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, एक नमो भारत ट्रेन और दूसरा मेट्रो संचालन के लिए जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नया आयाम देंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए प्रदेश में 27 एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं. इन क्लस्टरों के लिए 12,500 एकड़ भूमि का लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है. वर्तमान में प्रदेश में कुल 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है, जो निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेश मित्र पोर्टल और सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से 65 विभागों के 4,675 अनुपालन को सरल बनाया गया है. इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है. प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की निवेश क्षमता और विश्वसनीयता को दर्शाता है. ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से सात लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया जारी है.

कोविड काल में अन्य राज्यों से लौटे 40 लाख श्रमिकों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनमें से 90 प्रतिशत आज उत्तर प्रदेश में ही कार्यरत हैं. यह प्रदेश में रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार की सफलता का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, लॉजिस्टिक्स रैंकिंग, गुड गवर्नेंस इंडेक्स और डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अग्रणी स्थान पर है.
युवाओं के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत स्नातक एवं परास्नातक के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण के लिए 2375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस पहल से डिजिटल शिक्षा और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा मिलेगा तथा युवा वर्ग को रोजगारोन्मुखी अवसरों के लिए तैयार किया जा सकेगा.

हर जिले में बनेगा ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोनः मुख्यमंत्री 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रत्येक जनपद में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ स्थापित करने का प्रावधान किया है. यह पहल लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर प्रदेश में रोजगार और निवेश को एकीकृत ढांचे में बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह जोन ऐसा समेकित केंद्र होगा, जहां कोई भी युवा आए उसे उसकी क्षमता के अनुसार कौशल विकास का प्रशिक्षण मिलेगा और उसी के अनुरूप रोजगार या स्वरोजगार की तैयारी भी कराई जाएगी. प्रत्येक जोन पर लगभग 50 से 100 करोड़ रुपये तक व्यय किया जाएगा. इसके लिए लगभग 100 एकड़ भूमि, जो जनपद मुख्यालय से अत्यधिक दूर न हो, उपलब्ध कराई जाएगी.

एक ही परिसर में निवेश, प्रशिक्षण और रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सेवायोजन कार्यालय अलग-अलग होते थे और वास्तविक रूप से रोजगार सृजन में सीमित भूमिका निभा पाते थे. उद्योग विभाग की गतिविधियां भी बिखरी हुई थीं. अब इन सभी व्यवस्थाओं को एक ही छत के नीचे संचालित किया जाएगा. ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ में कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग लैब, प्रोडक्ट डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, प्रशिक्षण केंद्र और निवेश सहायता केंद्र जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इससे निवेश आकर्षित करने, कौशल विकास और रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया एकीकृत और प्रभावी बनेगी. मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान देने वाला कदम बताया.

‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ से पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ योजना के लिए भी प्रावधान किया गया है. ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ की अवधारणा के तहत प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मेरठ की रेवड़ी और गजक, हाथरस की हींग, हापुड़ के पापड़, प्रयागराज के अमरूद, बलिया का हलवा और जौनपुर की इमरती जैसे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाई जाएगी. यह पहल ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की तर्ज पर आगे बढ़ाई जाएगी.

महिला उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ योजना को महिला उद्यमिता सशक्तिकरण से भी जोड़ा जाएगा. स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कौशल विकास, निवेश प्रोत्साहन, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और महिला सशक्तिकरण इन सभी पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश को रोजगार और उद्यमिता का सशक्त मॉडल बनाया जा रहा है. बजट 2026-27 इसी समेकित विकास दृष्टि को आगे बढ़ाने वाला है.

अकेले उत्तर प्रदेश में 55 प्रतिशत स्मार्टफोन का हो रहा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन में भी अग्रणी: सीएम 

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. इस अवधि में प्रदेश ने इस सेक्टर में नई दिशा और नई गति के साथ कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज देश के कुल स्मार्टफोन निर्माण का 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा है. उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है. पूरे देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का लगभग 60 प्रतिशत उत्पादन यूपी में हो रहा है, जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार और निवेश का संकेत है.

21 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर में फैब यूनिट का किया जाएगा शिलान्यास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है. वैश्विक निवेश के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की शुरुआत कर दी है. 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से गौतमबुद्ध नगर में एक फैब यूनिट का शिलान्यास किया जाएगा. इस परियोजना में दुनिया की अग्रणी कंपनियां भारत से जुड़ी कंपनियों के साथ मिलकर निवेश करेंगी. यह उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है. सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए 32,196 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है. इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बजट में बड़ा प्रावधान किया गया है और सरकार इस क्षेत्र को और मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है. आईटी निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है. वर्ष 2015-16 में प्रदेश से आईटी फील्ड के सॉफ्टवेयर का निर्यात केवल 15,000 करोड़ रुपये तक सीमित था, जबकि आज यह बढ़कर 75 से 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. अकेले उत्तर प्रदेश से यह बड़ा निर्यात किया जा रहा है, जो प्रदेश की तकनीकी क्षमता और प्रतिभा का प्रमाण है.

आज प्रदेश में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय, आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में स्टार्टअप कल्चर का अभाव था, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं. उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया कि पहले का स्टार्टअप कल्चर “कट्टा-बम” तक सीमित था, जो एक प्रकार की अवैध गतिविधियों से जुड़ी मानसिकता को दर्शाता था. वर्तमान समय में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है. पंजीकृत स्टार्टअप में से लगभग आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. यह प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को मिल रहे प्रोत्साहन का प्रतीक है. उत्तर प्रदेश ने नेशनल स्टार्टअप रैकिंग में टॉप परफार्मर स्टेट के रूप में स्थान प्राप्त किया है. 

सरकार 25 लाख युवाओं को देगी एआर, वीआर और एक्सआर आधारित कौशल प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि “एआई प्रज्ञा” के तहत नागरिकों और कार्मिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में प्रशिक्षित करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. इस पहल के तहत  सरकार देश की तमाम बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है, ताकि प्रदेश के लोग नई तकनीकों में दक्ष बन सकें. मुख्यमंत्री ने सदन में इस पहल का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार जताया कि पिछले वर्ष ही माननीय सदस्यों को एआई में पारंगत बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था. उन्होंने कहा कि यह एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए और सरकार इसे निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्लोबल वैल्यू चेन में हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भी विशेष कार्यक्रम चला रही है. प्रदेश में तकनीकी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और टेक-युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं. इसी क्रम में सरकार ने 25 लाख युवाओं को एआर (Augmented Reality), वीआर (Virtual Reality) और एक्सआर (Extended Reality) आधारित कौशल प्रशिक्षण देने की बड़ी योजना बनाई है. इसके लिए बजट में विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है. सरकार का लक्ष्य है कि युवा इन उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित होकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त कर सकें. एआर ऐसी तकनीक है, जिसमें वास्तविक दुनिया को देखते हुए डिजिटल तत्व जोड़े जाते हैं. उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपनी आंखों से वास्तविक दुनिया देखता है, लेकिन चश्मे या मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से उस पर डिजिटल रास्ते, नाम या 3डी मॉडल प्रदर्शित किए जा सकते हैं. आज कई गेम्स और एप्लिकेशन में इसका उपयोग हो रहा है. सरकार इस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित कर उनका स्किल डेवलपमेंट करने जा रही है. 

वीआर आधारित कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ दिये गये

मुख्यमंत्री ने कि बताया कि वीआर तकनीक में उपयोगकर्ता हेडसेट पहनकर पूरी तरह कंप्यूटर जनरेटेड दुनिया में प्रवेश करता है. इसमें वास्तविक दुनिया दिखाई नहीं देती, बल्कि व्यक्ति एक वर्चुअल वातावरण अनुभव करता है. उदाहरण के तौर पर, कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपने घर में बैठकर किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल को देख सकता है या उसका आभासी अनुभव ले सकता है. इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन, शिक्षा और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं. सरकार ने वीआर आधारित कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.

उन्होंने कहा कि एक्सआर  हकीकत और डिजिटल का मिलन है. इसमें वास्तविक और डिजिटल दुनिया का ऐसा मेल होता है, जिसमें डिजिटल ऑब्जेक्ट्स केवल हवा में तैरते नहीं दिखाई देते, बल्कि उन्हें वास्तविक मेज या स्थान पर स्थापित कर इंटरैक्ट किया जा सकता है. सरकार इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाओं को विकसित करने की तैयारी कर रही है. सरकार ने इन उभरती तकनीकों के लिए पहली बार उत्तर प्रदेश के बजट में विशेष प्रावधान किया है. 

यू हब की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है. लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब (प्लग एंड प्ले, इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन) की स्थापना की जाएगी. यह यू-हब युवाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार से जुड़े उद्यमियों को एक ही स्थान पर आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा. ये सभी चीजें बताती हैं कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से आगे बढ़ चुका है और काफी चीजें उसके सामने देखने को मिल रही हैं. आज प्रदेश की तस्वीर बदली है क्योंकि सरकार ने उस दिशा में कार्य किया है.

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