बिलासपुर: सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्तर पर एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव हुआ है. गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने अब अपनी डिग्री, मार्कशीट और आधिकारिक दस्तावेजों में 'इंडिया' की जगह 'भारत' शब्द का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है. यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आलोक कुमार चक्रवाल ने शनिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमिटी ने करीब छह महीने पहले ही इस प्रस्ताव को पास कर दिया था. मौजूदा स्टॉक खत्म होने के बाद नई मार्कशीट और डिग्री सर्टिफिकेट में अंग्रेजी में भी 'India' की जगह 'Bharat' लिखा जाएगा.
G20 समिट से मिली प्रेरणा
वीसी चक्रवाल ने इस बदलाव की वजह बताते हुए कहा कि 2023 में भारत की G20 प्रेसीडेंसी के दौरान राष्ट्रपति द्वारा 'भारत' शब्द के इस्तेमाल को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. उन्होंने कहा, "जब देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद यह परंपरा निभा रहा है, तो हम भी इसका अनुसरण कर रहे हैं."
'भारत' हमारी सभ्यता की जड़
चक्रवाल ने आगे कहा कि 'भारत' शब्द की जड़ें हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, आर्यावर्त और जंबूद्वीप में गहरी हैं. 'इंडिया' नाम विदेशियों द्वारा अपनी सुविधा के लिए दिया गया था. हमें बाहरी नामों से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है. हम अपनी मूल परंपरा को मजबूत कर रहे हैं. वर्तमान में दस्तावेजों में हिंदी में 'भारत' और अंग्रेजी में 'India' दोनों का इस्तेमाल होता है. नए फैसले के तहत अंग्रेजी में भी 'Bharat' लिखा जाएगा.
अन्य विश्वविद्यालयों पर अभी कोई फैसला नहीं
रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय समेत राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों ने अभी तक ऐसा कोई बदलाव नहीं किया है. यह फैसला देशभर में चल रही 'भारत' vs 'इंडिया' बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी का यह कदम छात्रों के दस्तावेजों में सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. छात्रों और शिक्षा जगत में इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है.