ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू समुदाय ने भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और राम प्रतिमा निर्माण रोकने के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया. शुक्रवार को हजारों हिंदुओं ने मशाल जुलूस निकाला, 'जय श्री राम' के उद्घोष किए और सरकार से दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की.
उत्तर बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण चल रहा था. यह मंदिर परिसर का हिस्सा था, जिसमें भगवान कृष्ण (50 फीट) और शिव (30 फीट) की प्रतिमाएं भी बनाई जा रही थीं. काम करीब 80% पूरा हो चुका था, लेकिन कट्टरपंथी इस्लामिस्टों के विरोध और धमकियों के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गाइबांधा में इस्लामिस्ट भीड़ ने भगवान राम की तस्वीर पर जूता रखकर अपमान किया. इस घटना के खिलाफ हिंदू महाजोत समेत कई हिंदू संगठनों ने शाहबाग चौराहे से नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च निकाला. ह्यूमन चेन भी बनाई गई.
हिंदू समुदाय का अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने तारीक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. अगर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है. उन्होंने कहा कि अगर राम प्रतिमा का काम फिर शुरू नहीं हुआ तो पूरे बांग्लादेश के 64 जिलों में एक-एक राम मंदिर बनाया जाएगा. रंगपुर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और हिंदुओं के बीच हल्की झड़प भी हुई.
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक करीब 8% आबादी हैं. हाल के महीनों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने कहा, "हम डरे हुए हैं, इसलिए काम रोकना पड़ा." प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहने की संभावना है. राष्ट्रीय पूजा उत्सव समिति ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है. यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों और धार्मिक सहिष्णुता पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर रही है.