नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से कच्चे माल की सप्लाई रुकने के कारण भारत में कंडोम की कीमतें 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं. कंडोम बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे HLL लाइफकेयर, मैनकाइंड फार्मा और क्यूपिड लिमिटेड अब अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की कमी से जूझ रही हैं.
अमोनिया का इस्तेमाल लेटेक्स को स्थिर रखने के लिए होता है, जबकि सिलिकॉन ऑयल लुब्रिकेंट के रूप में काम आता है. भारत एनहाइड्रस अमोनिया के लिए 86 प्रतिशत आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है. हॉर्मुज क्षेत्र में युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से यह सप्लाई ठप हो गई है. सिलिकॉन ऑयल और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे उत्पादन में देरी हो रही है.
गरीबों और परिवार नियोजन पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि कंडोम महंगे होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. इससे गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल घट सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अनचाहे गर्भ, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा है. साथ ही यौन संचारित बीमारियों में भी इजाफा हो सकता है.
सरकार का 2030 तक आधुनिक गर्भनिरोधकों की उपलब्धता 75 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है.
बाजारों में अन्य वस्तुएं भी हुए प्रभावित
दिल्ली के बाजारों में ड्राई फ्रूट्स 50% तक महंगे हो गए हैं. पैरासिटामोल बनाने के कच्चे माल की कीमत में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर तैयार खाने और पैक्ड फूड की मांग में 15 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया है. कई कंपनियां युद्ध लंबा खिंचने की आशंका में कच्चा माल जमा कर रही हैं, जिससे बाजार में और दबाव बढ़ रहा है. अगर सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो कुछ ब्रांड्स बाजार से गायब भी हो सकते हैं.