बिहार का डोनर, यूपी की मरीज, दिल्ली से आती टीम, आधी रात होता था खेल...
6 लाख में खरीद, 80 लाख में बिक्री, 8वीं पास एंबुलेंस ड्राइवर निकला सबका सरगना!
कानपुर में खुला व्हाइट नेटवर्क का ऐसा खेल, नेपाल-अफ्रीका तक फैला है जाल!
ये है 8वीं पास शिवम अग्रवाल, जो काम तो एंबुलेंस चलाने का करता है, लेकिन ठाट-बाट राजाओं की तरह रखता है, ड्राइविंग की आड़ में इसने कानपुर में इतना बड़ा खेल रचा कि पुलिस के भी होश उड़ गए...बिहार के रहने वाले एक MBA स्टूडेंट आयुष को ये कहता है तुम्हारा बस एक फैसला तुम्हारे परिवार का दुख दर्द दूर कर देगा. फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग दौरान अमिताभ बच्चन के एक किडनी में इंफेक्शन हो गया था, पर आज वो ठीक हैं. प्रेमानंद महाराज की भी दोनों किडनियां खराब हैं. तुम अभी पूरी तरह से जवान हो, एक किडनी देने से कुछ नहीं होगा. मुहमांगी रकम मिलेगी. आयुष मान जाता है, वो मां को ये कहकर कानपुर पहुंचता है कि परीक्षा देकर तीन दिन में लौट जाऊंगा. पर वहां आहूजा अस्पताल में जाते ही उसे कहा जाता है 5 लाख रुपये मिलेंगे, जब ये विरोध करता है तो डील साढ़े 9 लाख में होती है..लेकिन रकम पूरी नहीं मिलती तो शिवम और आयुष के बीच विवाद इतना बढ़ जाता है कि बात पुलिस तक जा पहुंचती है, और 30 मार्च की रात यूपी पुलिस हॉस्पिटल पर छापा मार देती है...
एक साथ मेड लाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में पुलिस का छापा पड़ता है.
मेड लाइफ अस्पताल में किडनी डोनर आयुष भर्ती मिलता है, लेकिन ट्रांसप्लांट से जुड़े कागजात अस्पताल नहीं दिखा पाता
नतीजा आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, डॉ राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज देती है.
उसके बाद खुलती है असली कहानी, पता चलता है किडनी देने वालों को टेलीग्राम के जरिए शिवम अग्रवाल ही ढूंढता था.. 8वीं पास शिवम अग्रवाल जो खुद को डॉक्टर बताता था, वो इस पूरे रैकेट का सरगना है...4-6 लाख तक डोनर को मिलते थे और 80 लाख से एक करोड़ रुपये में ये मरीज को लगाया जाता था, बाकी की रकम आपस में डॉक्टर और स्टाफ बांट लेते थे...ऑपरेशन वाली रात अस्पताल का माहौल पूरी तरह से फिल्मी हो जाता है...दिल्ली से डॉक्टर की टीम पहुंचती थी, अस्पताल के पूरे स्टाफ की तब तक छुट्टी कर दी जाती थी, और अस्पताल का सीसीटीवी कैमरा भी बंद कर दिया जाता था, ताकि कोई सबूत न छूटे...
यहां तक कि वहां परिजनों को कहा जाता था डॉक्टर साहब व्यस्त हैं, रात में ऑपरेशन होगा, और सुबह होने से पहले ही डोनर और मरीज दोनों को अलग जगह शिफ्ट कर दिया जाता था, कोई भी निशान वहां नहीं मिलता था...अंदर ही अंदर ये रैकेट इतनी सावधानी से चल रहा था कि पुलिस तक कोई ख़बर ही नहीं पहुंच पा रही थी, पर एक नोंकझोक ने पूरी कहानी खोलकर रख दी..अब कानपुर के कमिश्नर रघुबीर लाल का कहना है
शुरुआती जांच में सामने आया कि अब तक कानपुर में 50 से अधिक लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया है. डॉ. रोहित कानपुर में अन्य जगहों पर भी ऑपरेशन करता रहा है. वह दिल्ली के डॉक्टर्स के संपर्क में है.इस मामले में 7 अस्पताल और रडार में आए हैं, इनमें एक लखनऊ और अन्य 6 कानपुर में हैं.
यहां तक कि ये नेटवर्क नेपाल और साउथ अफ्रीका तक में फैले होने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसका जांच में यूपी पुलिस सख्ती से जुटी है....इस मामले में अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो 10 साल की सजा और 5-10 लाख का जुर्माना लग सकता है....इसलिए सतर्क रहें, सावधान रहें..ऐसे लोगों के झांसे में न आएं, कोई कहकर बहलाने-फुसलाने की कोशिश करे तो इसकी सूचना अपने बड़ों और पुलिस को दें...और ये जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ताकि कोई ऐसे लोगों के झांसे में न आए...